KHud kii nigaah men hi mira ghar talash kar | ख़ुद की निगाह में ही मिरा घर तलाश कर

  - Prashant Kumar
ख़ुदकीनिगाहमेंहीमिराघरतलाशकर
घरपरनहींमिलूँतोतूछतपरतलाशकर
मेरीसुख़न-तराज़ियाँतेरेलिएनहीं
अपनेलिएतूऔरसुख़न-वरतलाशकर
ऐसेनहींबुझेगीहैसदियोंकीतिश्नगी
मेरेलिएअलगसेसमुंदरतलाशकर
रोनेसेतोकिसीकोभीमिलतानहींहूँमैं
बसएकबारतूमुझेहँसकरतलाशकर
जोज़िंदगीकेबंधनोंसेमुक्तकरसके
ऐसाजहाँकहींमिलेपत्थरतलाशकर
हरक़ौमसेजोमज़हब-ओ-मिल्लतसेहोजुदा
ऐसाप्रशांतकेलिएलश्करतलाशकर
  - Prashant Kumar
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