kya aftaab doon are kya mahtaab doon | क्या आफ़ताब दूँ अरे क्या माहताब दूँ

  - Prashant Kumar
क्याआफ़ताबदूँअरेक्यामाहताबदूँ
ख़ुदहीगुलाबहैजोउसेक्यागुलाबदूँ
अच्छीनहींलगेगीनईचीज़आपपर
सोसोचताहूँसब
मेंनिशानीख़राबदूँ
ख़ंजरसेजोसुकूनकीरोटीकमारहे
उनहाथमेंतूहीबताकैसेकिताबदूँ
मयख़ानेबंदहोगएतोक्याहुआसनम
तुझकोलगानीहोतोबताफिरशराबदूँ
अबक्यामय-ए-नशातहैऔरक्यामय-ए-हराम
ख़ुदहीशराबहैजोउसेक्याशराबदूँ
जिसनेसिवाएनींदकेदेखानहींहैकुछ
उसदिलरुबाकोकैसेमैंता'मीर-ए-ख़्वाबदूँ
  - Prashant Kumar
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