jab aankh mil rahi hai vo muskuraa raha hai | जब आँख मिल रही है वो मुस्कुरा रहा है

  - Prashant Kumar
जबआँखमिलरहीहैवोमुस्कुरारहाहै
हरचीज़केबहानेहमकोबुलारहाहै
हमहालपूछतेहैंवोभावखारहाहै
उस
मेंतरह-तरहकीबातेंमिलारहाहै
देखोतोयेनज़ाराजन्नतसेकमनहींहै
दीदारकोमिरेवोपर्दाउठारहाहै
हमबात-बातपरयूँँनख़रेउठातेफिरते
औरतूजवानहोकरहमकोसतारहाहै
रखदीज़मीनगिरवीबेटापढ़ाईख़ातिर
गाँजाभीपीरहाहैहरगुलखिलारहाहै
हमकोतोइश्क़मेंवोनादानलगरहाहै
नज़रेंमिलामिलाकरनज़रेंचुरारहाहै
जिसकीसलामतीमेंहमख़ाकहोगएहैं
वोमुल्कयारहमकोदुश्मनबतारहाहै
  - Prashant Kumar
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