KHvaabon men sahi roz sataane ke li.e aa | ख़्वाबों में सही रोज़ सताने के लिए आ

  - Prashant Kumar
ख़्वाबोंमेंसहीरोज़सतानेकेलिए
फिरसेमिरेदिलकोचुरानेकेलिए
हरकोईसमझताहैमुझेकाँचकामरहम
कुछऔरहूँमैंइनकोबतानेकेलिए
हरबारतिरेबसमेंकहाँमुझकोउठाना
इसबारनिगाहोंसेगिरानेकेलिए
वोरातवहीदिनवहीतन्हाईकाआलम
आँखोंमेंवहीप्यासजगानेकेलिए
साँसोंकेचराग़ाँतिरीज़ुल्फ़ोंनेबुझाए
अबतूहीजनाज़ेकोउठानेकेलिए
इकतेरेसिवाथाहीमिराकौनजहाँमें
सोक़ब्रकीभीरस्मनिभानेकेलिए
जिनदस्त-ए-मुबारकमेंमिरीजानबसीथी
मस्जिदमेंवहीहाथउठानेकेलिए
  - Prashant Kumar
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