hunar zindagi ka sikha dooñga main | हुनर ज़िंदगी का सिखा दूँगा मैं

  - Prashant Kumar
हुनरज़िंदगीकासिखादूँगामैं
अरेसबकोआलिमबनादूँगामैं
ख़ुदाहोयाहाकिमयाकोईवजीर
अरेउँगलियोंपरनचादूँगामैं
ग़रीबीअमीरीमेंक्याफ़र्क़है
जोज़िंदारहातोदिखादूँगामैं
मुझेडरनहींहैकिसीकाकोई
ख़ुदाभीमिलातोसुनादूँगामैं
भिकारीइसीमुल्ककेहैंसभी
इन्हेंइनकाहक़भीदिलादूँगामैं
अभीकामसेजारहाहूँकहीं
वफ़ाफिरकिसीदिनसिखादूँगामैं
वोक्यूँँदेखताहैमुझेआजकल
चलइसकासबबभीबतादूँगामैं
जोमाता-पिताकोअगरकुछहुआ
ज़मींआसमाँकोहिलादूँगामैं
  - Prashant Kumar
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