aankhoñ men tiri pyaar ka paighaam sa kyun hai | आँखों में तिरी प्यार का पैग़ाम सा क्यूँँ है

  - Prashant Kumar
आँखोंमेंतिरीप्यारकापैग़ामसाक्यूँँहै
कुछस्वादतिरेहोंटकाबादामसाक्यूँँहै
चलमानलियाइस
मेंतिरादोषनहींहै
हरशख़्सतिरेनामसेबदनामसाक्यूँँहै
मैंनेतोसुनाथातूमुहब्बतकाख़ुदाहै
फिरसरपेतिरेइश्क़काइल्ज़ामसाक्यूँँहै
जबतूनेदवाग़मकीकहींसेभीनहींली
तोइतनाबतादिलकोफिरआरामसाक्यूँँहै
सूरतभीअलगहैतिरीसीरतभीअलगहै
फिरबोलतिरानाममिरेनामसाक्यूँँहै
  - Prashant Kumar
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