bas ik aur hi boond khaate men nikli | बस इक और ही बूँद खाते में निकली

  - Prashant Kumar
बसइकऔरहीबूँदखातेमेंनिकली
धधकतीहुईआगसीनेमेंनिकली
क़यामतनज़रआईहैक़ब्रमेंभी
वोयूँँबनसँवरकेजनाज़ेमेंनिकली
हमेंजिसकाडरथावहीतोहुआहै
वहीबातउसकेइरादेमेंनिकली
सभीकुछथाबिखराहुआमय-कदेमें
किसोतीहुईवोभीकाबेमेंनिकली
मोहब्बतनहींमुझसेेकहतारहावो
मगरमेरीफोटोलिफ़ाफ़ेमेंनिकली
अरेज़िंदगीकोकहाँपरढूँढा
मगरयेतोगन्नेकेबाड़ेमेंनिकली
किकिसजुर्मकीफिरसज़ामिलरहीहै
बताक्याकमीमेरेनातेमेंनिकली
  - Prashant Kumar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy