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Adarsh Akshar
dard deti hai mohabbat
dard deti hai mohabbat | दर्द देती है मोहब्बत
- Adarsh Akshar
दर्द
देती
है
मोहब्बत
आग
जैसी
है
मोहब्बत
रात
में
जुगनू
सी
है
और
दिन
में
तितली
है
मोहब्बत
दुख
नहीं
देता
किसी
को
जिसने
समझी
है
मोहब्बत
दुनिया
की
आँखों
में
इतनी
क्यूँ
खटकती
है
मोहब्बत
कर
के
ही
मालूम
होगा
कितनी
अच्छी
है
मोहब्बत
- Adarsh Akshar
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चुप-चाप
अपनी
आग
में
जलते
रहो
'फ़राज़'
दुनिया
तो
अर्ज़-ए-हाल
से
बे-आबरू
करे
Ahmad Faraz
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उस
से
कहना
की
धुआँ
देखने
लाएक़
होगा
आग
पहने
हुए
मैं
जाऊँगा
पानी
की
तरफ़
Abhishek shukla
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आँसू
पोंछ
के
हँस
देता
है
आग
में
आग
लगाने
वाला
Arzoo Lakhnavi
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दिल
की
ख़ातिर
एक
रिश्ते
को
बचाने
के
लिए
आग
मैंने
ही
लगा
ली
ख़ुद
मिरे
घरबार
में
Shashank Shekhar Pathak
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किसी
की
तपिश
में
ख़ुशी
है
किसी
की
किसी
की
ख़लिश
में
मज़ा
है
किसी
का
Unknown
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उनके
लहजे
में
आग
है
साहब
ये
तो
हम
हैं
जो
भीग
जाते
हैं
Atul K Rai
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इक
बर्फ़
सी
जमी
रहे
दीवार-ओ-बाम
पर
इक
आग
मेरे
कमरे
के
अंदर
लगी
रहे
Salim Saleem
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वो
तो
सारी
आग
है
चाहे
जहाँ
से
चूम
लो,
हाँ
मगर
माथे
पे
बोसे
का
मज़ा
कुछ
और
है
Alankrat Srivastava
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आग
अपने
ही
लगा
सकते
हैं
ग़ैर
तो
सिर्फ़
हवा
देते
हैं
Mohammad Alvi
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ये
इश्क़
आग
है
और
वो
बदन
शरारा
है
ये
सर्द
बर्फ़
सा
लड़का
पिघलने
वाला
है
Shadab Asghar
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दिल
की
बातें
मुँह
पर
थी
वो
दुनिया
से
हट
कर
थी
नज़्में
मेरी
अच्छी
थी
ग़ज़लें
उसकी
बेहतर
थी
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Adarsh Akshar
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दुनिया
कहती
थी
मुश्किल
है
लेकिन
दिल
तो
आख़िर
दिल
है
जी
जाँ
इक
करना
पड़ता
है
तब
जाकर
मिलती
मंज़िल
है
मैं
उसके
सुख
में
शामिल
था
वो
मेरे
दुख
में
शामिल
है
मैंने
वो
सब
कुछ
बाँटा
है
जो
कुछ
भी
मुझको
हासिल
है
'अक्षर'
के
बस
आ
जाने
से
खिल
उठती
सारी
महफ़िल
है
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Adarsh Akshar
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जल्दी
दुनियादारी
समझो
तरकीबें
तुम
सारी
समझो
जग
को
बेहतर
करना
है
तो
अपनी
ज़िम्मेदारी
समझो
सबके
हिस्से
आ
जाता
है
ग़म
की
कारोबारी
समझो
बात
तुम्हारी
समझी
हमने
अब
तुम
बात
हमारी
समझो
ग़ज़लें
नज़्में
पढ़ते
हो
तो
अपनी
पक्की
यारी
समझो
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Adarsh Akshar
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थोड़ी
थोड़ी
रौशनी
थी
थोड़ी
थोड़ी
तीरगी
थी
मैं
ज़रा
सा
सर-फिरा
था
वो
ज़रा
सी
चिड़चिड़ी
थी
सौ
दफ़ा
अब
कह
चुका
हूँ
ये
मोहब्बत
आख़िरी
थी
लाज़मी
था
बोलना
पर
मुँह
पे
सबके
ख़ामुशी
थी
साथ
कोई
था
नहीं
जब
पास
मेरे
शा'इरी
थी
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Adarsh Akshar
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दुनिया
कहती
थी
सरफिरा
लड़का
फिर
भी
तुम
पर
था
मर
मिटा
लड़का
तजरबे
बांटता
था
सब
सेे
ही
देता
था
सबको
मशवरा
लड़का
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Adarsh Akshar
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