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Abdul Hamid Adam
hañs ke bola karo bulaayaa karo
hañs ke bola karo bulaayaa karo | हँस के बोला करो बुलाया करो
- Abdul Hamid Adam
हँस
के
बोला
करो
बुलाया
करो
आप
का
घर
है
आया
जाया
करो
मुस्कुराहट
है
हुस्न
का
ज़ेवर
मुस्कुराना
न
भूल
जाया
करो
हद
से
बढ़
कर
हसीन
लगते
हो
झूटी
क़स्में
ज़रूर
खाया
करो
ताकि
दुनिया
की
दिलकशी
न
घटे
नित-नए
पैरहन
में
आया
करो
कितने
सादा-मिज़ाज
हो
तुम
'अदम'
उस
गली
में
बहुत
न
जाया
करो
- Abdul Hamid Adam
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मौत
न
आई
तो
'अल्वी'
छुट्टी
में
घर
जाएँगे
Mohammad Alvi
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हर
इक
सू
हैं
दर-ओ-दीवार
लेकिन
मुयस्सर
है
नहीं
घर-बार
लेकिन
Umrez Ali Haider
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घर
से
निकले
थे
हौसला
कर
के
लौट
आए
ख़ुदा
ख़ुदा
कर
के
ज़िंदगी
तो
कभी
नहीं
आई
मौत
आई
ज़रा
ज़रा
करके
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Rajesh Reddy
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घर
की
इस
बार
मुकम्मल
मैं
तलाशी
लूँगा
ग़म
छुपा
कर
मिरे
माँ
बाप
कहाँ
रखते
थे
Unknown
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घर
में
झीने
रिश्ते
मैंने
लाखों
बार
उधड़ते
देखे
चुपके
चुपके
कर
देती
है
जाने
कब
तुरपाई
अम्मा
Aalok Shrivastav
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पहले
कहता
है
जुनूँ
उसका
गिरेबान
पकड़
फिर
मेरा
दिल
मुझे
कहता
है
इधर
कान
पकड़
ऐसी
वहशत
भी
न
हो
घर
के
दरो
बाम
कहें
कोई
आवाज़
ही
ले
आ
कोई
मेहमान
पकड़
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Azbar Safeer
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जिसे
तुम
काट
आए
उस
शजर
को
ढूँढता
होगा
परिंदा
लौटकर
के
अपने
घर
को
ढूँढता
होगा
Bhaskar Shukla
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ख़ून
से
जोड़ा
हुआ
हर
ईंट
ढेला
हो
गया
दो
तरफ़
चूल्हे
जले
औ'
घर
अकेला
हो
गया
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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चराग़
घर
का
हो
महफ़िल
का
हो
कि
मंदिर
का
हवा
के
पास
कोई
मसलहत
नहीं
होती
Waseem Barelvi
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सब
कुछ
तो
है
क्या
ढूँडती
रहती
हैं
निगाहें
क्या
बात
है
मैं
वक़्त
पे
घर
क्यूँँ
नहीं
जाता
Nida Fazli
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फिर
आज
'अदम'
शाम
से
ग़मगीं
है
तबीअत
फिर
आज
सर-ए-शाम
मैं
कुछ
सोच
रहा
हूँ
Abdul Hamid Adam
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दिल
अभी
पूरी
तरह
टूटा
नहीं
दोस्तों
की
मेहरबानी
चाहिए
Abdul Hamid Adam
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हद
से
बढ़
कर
हसीन
लगते
हो
झूटी
क़स
में
ज़रूर
खाया
करो
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Abdul Hamid Adam
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ऐ
ग़म-ए-ज़िंदगी
न
हो
नाराज़
मुझ
को
आदत
है
मुस्कुराने
की
Abdul Hamid Adam
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जब
तिरे
नैन
मुस्कुराते
हैं
ज़ीस्त
के
रंज
भूल
जाते
हैं
क्यूँँ
शिकन
डालते
हो
माथे
पर
भूल
कर
आ
गए
हैं
जाते
हैं
कश्तियाँ
यूँँ
भी
डूब
जाती
हैं
नाख़ुदा
किस
लिए
डराते
हैं
इक
हसीं
आँख
के
इशारे
पर
क़ाफ़िले
राह
भूल
जाते
हैं
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Abdul Hamid Adam
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