hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Ajeetendra Aazi Tamaam
bhatkte hue dar-b-dar zindagi
bhatkte hue dar-b-dar zindagi | भटकते हुए दर-ब-दर ज़िंदगी
- Ajeetendra Aazi Tamaam
भटकते
हुए
दर-ब-दर
ज़िंदगी
करे
ज़िंदगी
भर
सफ़र
ज़िंदगी
हैं
लाखों
ठिकाने
मगर
जाने
क्यूँ
चुने
मौत
को
अपना
घर
ज़िंदगी
- Ajeetendra Aazi Tamaam
Download Sher Image
फ़न्न-ए-ग़ज़ल-आराई
दे
लहजे
को
सच्चाई
दे
दुनिया
है
जंगल
का
सफ़र
लछमन
जैसा
भाई
दे
Read Full
Tariq Shaheen
Send
Download Image
32 Likes
सफ़र
में
आख़िरी
पत्थर
के
बाद
आएगा
मज़ा
तो
यार
दिसंबर
के
बाद
आएगा
Rahat Indori
Send
Download Image
120 Likes
ये
आँसू
ढूँडता
है
तेरा
दामन
मुसाफ़िर
अपनी
मंज़िल
जानता
है
Asad Bhopali
Send
Download Image
23 Likes
सफ़र
से
लौट
जाना
चाहता
है
परिंदा
आशियाना
चाहता
है
Shakeel Jamali
Send
Download Image
39 Likes
ये
दिल
मलूल
भी
कम
है
उदास
भी
कम
है
कई
दिनों
से
कोई
आस
पास
भी
कम
है
हमें
भी
यूँं
ही
गुजरना
पसंद
है
और
फिर
तुम्हारा
शहर
मुसाफ़िर-शनास
भी
कम
है
Read Full
Farhat Abbas Shah
Send
Download Image
32 Likes
वो
राही
हूँ
पलभर
के
लिए,
जो
ज़ुल्फ़
के
साए
में
ठहरा,
अब
ले
के
चल
दूर
कहीं,
ऐ
इश्क़
मेरे
बेदाग
मुझे
।
Raja Mehdi Ali Khan
Send
Download Image
22 Likes
कोई
तुम्हारा
सफ़र
पर
गया
तो
पूछेंगे
रेल
देख
के
हम
हाथ
क्यूँ
हिलाते
हैं
Tehzeeb Hafi
Send
Download Image
112 Likes
यही
तो
एक
तमन्ना
है
इस
मुसाफ़िर
की
जो
तुम
नहीं
तो
सफ़र
में
तुम्हारा
प्यार
चले
Aalok Shrivastav
Send
Download Image
23 Likes
कभी
तो
कोसते
होंगे
सफ़र
को
कभी
जब
याद
करते
होंगे
घर
को
निकल
पड़ती
हैं
औलादें
कमाने
परिंदे
खोल
ही
लेते
हैं
पर
को
Read Full
Siddharth Saaz
Send
Download Image
56 Likes
सफ़र
में
धूप
तो
होगी
जो
चल
सको
तो
चलो
सभी
हैं
भीड़
में
तुम
भी
निकल
सको
तो
चलो
Nida Fazli
Send
Download Image
49 Likes
Read More
तू
आसमाँ
का
हसीं
चाँद
और
मैं
दीवाना
मुझे
तो
सिर्फ़
तेरा
इंतज़ार
करना
है
Ajeetendra Aazi Tamaam
Send
Download Image
1 Like
यूँँ
बहाएा
न
कर
सर-ए-महफ़िल
अश्क
आँखों
का
आब-ए-ज़मज़म
है
Ajeetendra Aazi Tamaam
Send
Download Image
1 Like
चले
हैं
हिंद
के
सैनिक
ज़फ़र
को
कटा
लेंगे
झुकाएँगे
न
सर
को
कि
सूखे
टुंड
पर
लगते
नहीं
फल
गिरा
दो
काट
दो
अब
इस
शजर
को
नहीं
उस्ताद
कोई
उनके
जैसा
जो
समझाए
सुख़न
के
हर
भँवर
को
ग़ज़ल
है
मुंतज़िर
इस्लाह
को
इक
मिलो
गर
तुम
तो
ये
कहना
"समर"
को
दो
रोटी
और
बस
कपड़ा
मकान
इक
नहीं
काफ़ी
ओ
दीवाने
गुज़र
को
तुझे
लड़ना
है
प्रतिपल
ज़िंदगी
से
मिला
नज़रें
डरा
दे
अपने
डर
को
जुदा
होकर
वो
देखो
इक
सफ़र
से
चला
है
दिल
मिरा
फिर
इक
सफ़र
को
मोहब्बत
के
मरीजों
पर
मिरी
जाँ
तरस
आए
हर
इक
दीवार
दर
को
दवाएँ
फेल
होती
जा
रही
हैं
सभी
मिलकर
दु'आ
भेजो
असर
को
मैं
अपनी
ज़िंदगी
में
ऐसा
उलझा
लगी
दीमक
मेरे
दस्त-ए-हुनर
को
तुम्हें
गर
सुर्ख़र-रू
होना
है
यारो
जला
दो
फूँक
दो
दिल
के
नगर
को
Read Full
Ajeetendra Aazi Tamaam
Download Image
0 Likes
क्या
कहा
दर्द
ए
दिल
रवा
कर
लें
अपने
ज़ख़्मों
की
हम
दवा
कर
लें
हम
तो
वो
हैं
जो
घाव
भरते
ही
घिस
के
नाख़ून
से
नवा
कर
लें
Read Full
Ajeetendra Aazi Tamaam
Send
Download Image
1 Like
डर
से
रख
दी
है
रूह
तक
गिरवी
एक
तितली
ने
पर
बचाने
को
Ajeetendra Aazi Tamaam
Send
Download Image
1 Like
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Shehar Shayari
Bewafai Shayari
Angdaai Shayari
Good night Shayari
Akhbaar Shayari