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Aatish Indori
yaar ye kis tarah ka manzar hai
yaar ye kis tarah ka manzar hai | यार ये किस तरह का मंज़र है
- Aatish Indori
यार
ये
किस
तरह
का
मंज़र
है
हाथ
में
हर
किसी
के
ख़ंजर
है
- Aatish Indori
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जब
बात
वफ़ा
की
आती
है
जब
मंज़र
रंग
बदलता
है
और
बात
बिगड़ने
लगती
है
वो
फिर
इक
वा'दा
करते
हैं
Afeef siraj
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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पस-मंज़र
में
'फ़ीड'
हुए
जाते
हैं
इंसानी
किरदार
फ़ोकस
में
रफ़्ता
रफ़्ता
शैतान
उभरता
आता
है
Abdul Ahad Saaz
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एक
दफ़ा
बस
वापस
मंज़र
ऐसा
हो
हाथ
मेरा
सीधा
और
उल्टा
तेरा
हो
Tanoj Dadhich
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सब
यार
सोचते
थे
रहेगा
वही
समाँ
इक
मैं
ही
बस
बचा
हूँ
कोई
सौ
पचास
में
Amaan Pathan
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निगाहों
के
तक़ाज़े
चैन
से
मरने
नहीं
देते
यहाँ
मंज़र
ही
ऐसे
हैं
कि
दिल
भरने
नहीं
देते
हमीं
उन
से
उमीदें
आसमाँ
छूने
की
करते
हैं
हमीं
बच्चों
को
अपने
फ़ैसले
करने
नहीं
देते
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Waseem Barelvi
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ग़ज़ल
बनकर
मेरे
दिल
में
समा
जा
मैं
तुझको
गुनगुनाना
चाहता
हूँ
D Faiz Khan
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दो
मुल्कों
के
सियासी
खेल
में
जाने
यहाँ
पर
कितनों
के
घर
उजड़े
हैं
मौला
वही
हर
सुब्ह
मंज़र
देखना
पड़ता
हज़ारों
लोग
यूँँ
ही
मरते
हैं
मौला
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Harsh saxena
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जिस
शाने
पर
सर
रखते
हो
उस
शाने
पर
सो
जाते
हो
जाने
कैसे
दीदावर
हो
हर
मंज़र
में
खो
जाते
हो
Poonam Yadav
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वो
आँखें
बुझ
चुकी
होंगी
नज़ारा
हो
चुका
होगा
'अली'
वो
शख़्स
अब
दुनिया
को
प्यारा
हो
चुका
होगा
Ali Zaryoun
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मौज
जाएगी
हया-दार
नज़र
आने
से
मैं
तो
बोतल
से
पि
यूँँगा
न
कि
पैमाने
से
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Aatish Indori
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चाहता
हूँ
कि
दूजी
राह
मिले
राह-ए-उल्फ़त
में
सब
तबाह
मिले
ज़िद
है
मेरी
वहीं
रुकूँगा
मैं
उम्र
भर
को
जहाँ
पनाह
मिले
बे-वफ़ा
हो
तो
भी
दु'आ
ले
लो
आपको
इश्क़
बे-पनाह
मिले
इसलिए
बन
गया
हूँ
मैं
रहबर
दूसरों
को
सहीह
राह
मिले
बेवफ़ाई
नहीं
की
है
मैंने
कहने
को
पर
कोई
गवाह
मिले
शहर
को
शहर-ए-इश्क़
कैसे
कहूँ
हर
जगह
मुझको
क़त्ल-गाह
मिले
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Aatish Indori
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जो
हल
सोचा
था
वो
निकाला
गया
है
कई
बार
सिक्का
उछाला
गया
है
मेरे
शे'र
ख़ारिज
हुये
एक
मुद्दत
समुंदर
से
गौहर
निकाला
गया
है
यहाँ
लड़कियाँ
दो
हैं
और
एक
चॉइस
मुझे
सिक्के
जैसा
उछाला
गया
है
वहाँ
रोशनी
की
ज़रूरत
है
आतिश
जहाँ
से
ये
पत्थर
उछाला
गया
है
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Aatish Indori
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ख़ुद
चलो
रास्ता
नहीं
चलता
इश्क़
में
पैंतरा
नहीं
चलता
जिसको
जाना
है
वो
तो
जाएगा
इश्क़
का
वास्ता
नहीं
चलता
देखिए
इश्क़
एक
जंगल
है
रास्तों
का
पता
नहीं
चलता
एक
लम्बा
समय
गुज़रने
दो
चार
दिन
में
पता
नहीं
चलता
गाँव
को
अब
महानगर
समझो
हादसों
का
पता
नहीं
चलता
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Aatish Indori
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क़ैस-ओ-लैला
का
ज़माना
यूँँ
तो
दीवाना
है
पर
मोहब्बत
पे
बड़ी
सख़्ती
है
जुर्माना
है
Aatish Indori
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Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
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