chahta hooñ ki dooji raah mile | चाहता हूँ कि दूजी राह मिले

  - Aatish Indori
चाहताहूँकिदूजीराहमिले
राह-ए-उल्फ़तमेंसबतबाहमिले
ज़िदहैमेरीवहींरुकूँगामैं
उम्रभरकोजहाँपनाहमिले
बे-वफ़ाहोतोभीदु'आलेलो
आपकोइश्क़बे-पनाहमिले
इसलिएबनगयाहूँमैंरहबर
दूसरोंकोसहीहराहमिले
बेवफ़ाईनहींकीहैमैंने
कहनेकोपरकोईगवाहमिले
शहरकोशहर-ए-इश्क़कैसेकहूँ
हरजगहमुझकोक़त्ल-गाहमिले
  - Aatish Indori
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