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Aatish Indori
tijori to bharii lekin thagaai bhi ki usne
tijori to bharii lekin thagaai bhi ki usne | तिजोरी तो भरी लेकिन ठगाई भी की उसने
- Aatish Indori
तिजोरी
तो
भरी
लेकिन
ठगाई
भी
की
उसने
वफ़ा
की
ढेर
लेकिन
बेवफ़ाई
भी
की
उसने
- Aatish Indori
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उसने
पूछा
था
पहले
हाल
मेरा
फिर
किया
देर
तक
मलाल
मेरा
मैं
वफ़ा
को
हुनर
समझता
था
मुझपे
भारी
पड़ा
कमाल
मेरा
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Subhan Asad
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जब
बात
वफ़ा
की
आती
है
जब
मंज़र
रंग
बदलता
है
और
बात
बिगड़ने
लगती
है
वो
फिर
इक
वा'दा
करते
हैं
Afeef siraj
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ये
और
बात
कि
इक़रार
कर
सकें
न
कभी
मिरी
वफ़ा
का
मगर
उन
को
ए'तिबार
तो
है
Aleem Akhtar
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कोई
चादर
वफ़ा
नहीं
करती
वक़्त
जब
खींच-तान
करता
है
Unknown
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इस
ज़माने
को
ज़माने
की
अदा
आती
है
और
इक
हम
है
हमें
सिर्फ़
वफ़ा
आती
है
Zubair Ali Tabish
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आसान
नहीं
मरहला-ए-तर्क-ए-वफ़ा
भी
मुद्दत
हुई
हम
इस
को
भुलाने
में
लगे
हैं
Hafeez Banarasi
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ये
होली
ईद
कहती
है
भला
कब
अपने
हाथों
में
वफ़ा
का
रंग
होगा
प्यार
की
पिचकारियाँ
होंगी
Saleem Raza Rewa
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जिसकी
फ़ितरत
ही
बे
वफ़ाई
हो
उस
सेे
उम्मीद-ए-वफ़ा
क्या
करना
Ajeetendra Aazi Tamaam
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हमेशा
इक
दूसरे
के
हक़
में
दु'आ
करेंगे
ये
तय
हुआ
था
मिलें
या
बिछड़ें
मगर
तुम्हीं
से
वफ़ा
करेंगे
ये
तय
हुआ
था
Shabeena Adeeb
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बेशक़
तू
बे-वफ़ा
का
सनम
नाम
दे
मुझे
बाद
आज़माने
के
मगर
इल्ज़ाम
दे
मुझे
Ajeetendra Aazi Tamaam
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मेरी
आँखों
का
जाला
छट
रहा
है
दिखेगा
सच
कि
कुहरा
छट
रहा
है
हुए
मनभेद
थोड़े
कम
तो
देखो
वतन
पर
आया
ख़तरा
छट
रहा
है
दिए
में
लौ
नहीं
है
शेष
फिर
भी
दिलों
पर
से
अँधेरा
छट
रहा
है
शफ़क़
दिखने
में
इक
मुद्दत
लगेगी
बहुत
धीरे
कुहासा
छट
रहा
है
दिलों
पे
खिंच
रही
है
फिर
से
सरहद
हमारा
फिर
से
शजरा
छट
रहा
है
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Aatish Indori
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वो
कहाँ
सबको
ख़ास
करता
है
इक
मुझे
ही
उदास
करता
है
एक
ही
क्लास
में
रखे
है
मुझे
दूसरों
को
तो
पास
करता
है
ढूढ़
लाता
है
बद-ख़यालों
को
ख़ुद
को
फिर
बद-हवा
से
करता
है
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Aatish Indori
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आज
भी
वो
वो
ही
है
और
अदा
भी
वो
ही
है
बे-वफ़ा
भी
वो
ही
है
और
ख़फ़ा
भी
वो
ही
है
Aatish Indori
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ख़ुद
को
तू
ख़ुद
ही
तंग
मत
करना
बद-ख़यालों
से
जंग
मत
करना
धन
बढ़ाने
का
देता
हूँ
मंतर
कभी
भी
हाथ
तंग
मत
करना
तुम
बड़प्पन
में
घर
गँवा
बैठे
कहा
किसने
था
जंग
मत
करना
घर
में
रह
लो
मगर
निवेदन
है
बाद
में
हमको
तंग
मत
करना
सिर्फ़
रोटी
चुराई
है
साहब
इसलिए
अंग-भंग
मत
करना
नाम
लेकर
उतार
दी
फिर
से
रंग
में
फिर
से
भंग
मत
करना
बाद
मुद्दत
मैं
मुस्कुराया
हूँ
एक
दो
दिन
तो
तंग
मत
करना
मिलना-जुलना
ही
बंद
हो
जाए
रास्ता
इतना
तंग
मत
करना
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Aatish Indori
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पीटता
हूँ
हथौड़े
से
सोना
कौन
मुझको
सुनार
बोलेगा
चाँद
कितने
क़रीब
आया
है
ये
समुंदर
का
ज्वार
बोलेगा
मौत
से
पहले
कब
मरे
माँ-बाप
चीख़
कर
घर
का
द्वार
बोलेगा
बात
एक-एक
मानी
है
उसकी
फिर
भी
बातें
हज़ार
बोलेगा
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Aatish Indori
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