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Aatish Indori
khud ko tu khud hi tang mat karna
khud ko tu khud hi tang mat karna | ख़ुद को तू ख़ुद ही तंग मत करना
- Aatish Indori
ख़ुद
को
तू
ख़ुद
ही
तंग
मत
करना
बद-ख़यालों
से
जंग
मत
करना
धन
बढ़ाने
का
देता
हूँ
मंतर
कभी
भी
हाथ
तंग
मत
करना
तुम
बड़प्पन
में
घर
गँवा
बैठे
कहा
किसने
था
जंग
मत
करना
घर
में
रह
लो
मगर
निवेदन
है
बाद
में
हमको
तंग
मत
करना
सिर्फ़
रोटी
चुराई
है
साहब
इसलिए
अंग-भंग
मत
करना
नाम
लेकर
उतार
दी
फिर
से
रंग
में
फिर
से
भंग
मत
करना
बाद
मुद्दत
मैं
मुस्कुराया
हूँ
एक
दो
दिन
तो
तंग
मत
करना
मिलना-जुलना
ही
बंद
हो
जाए
रास्ता
इतना
तंग
मत
करना
- Aatish Indori
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रंग
सारे
फीके
फीके
ही
लगेंगे
मुझको
अब
उनकी
आँखों
का
जो
काला
सुर्मा
देखा
है
अभी
Harsh saxena
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कैसा
मुझ
को
बना
दिया
'अम्मार'
कौन
सा
रंग
भर
गए
मुझ
में
Ammar Iqbal
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जब
फागुन
रंग
झमकते
हों
तब
देख
बहारें
होली
की
और
दफ़
के
शोर
खड़कते
हों
तब
देख
बहारें
होली
की
Nazeer Akbarabadi
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देखो
तो
हर
इक
रंग
से
मिलता
है
मेरा
रंग
सोचो
तो
हर
इक
बात
है
औरों
से
जुदा
भी
Athar Nadir
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रंग
बदला
यार
ने
वो
प्यार
की
बातें
गईं
वो
मुलाक़ातें
गईं
वो
चाँदनी
रातें
गईं
Hafeez Jalandhari
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चले
भी
आओ
भुला
कर
सभी
गिले-शिकवे
बरसना
चाहिए
होली
के
दिन
विसाल
का
रंग
Azhar Iqbal
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क़र्ज़
की
पीते
थे
मय
लेकिन
समझते
थे
कि
हाँ
रंग
लावेगी
हमारी
फ़ाक़ा-मस्ती
एक
दिन
Mirza Ghalib
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महक
उठे
रंग-ए-सुर्ख़
जैसे
खिले
चमन
में
गुलाब
इतने
Muneer Niyazi
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रंग
गालों
पे
लगा
रहने
दो
ख़ूब
जँचता
है
ये
गहना
तुम
पर
Mukesh Jha
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ग़ैर
से
खेली
है
होली
यार
ने
डाले
मुझ
पर
दीदा-ए-ख़ूँ-बार
रंग
Imam Bakhsh Nasikh
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जो
जो
आरोप
हैं
उन
सब
पे
सफ़ाई
देंगे
हम
तो
जनता
की
अदालत
से
रिहाई
लेंगे
Aatish Indori
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महज़
'आशिक़
है
दीवाने
नहीं
हैं
वे
जो
मय-ख़ाने
में
बैठे
हैं
जो
दीवाने
हैं
वे
माशूक़
की
बाँहों
में
वीराने
में
बैठे
हैं
Aatish Indori
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तय
हुआ
था
यह
कि
इक
दूजे
को
भूलेंगे
नहीं
कुछ
भी
हो
जाए
मगर
फाँसी
पे
झूलेंगे
नहीं
Aatish Indori
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करी
जो
बात
तो
रिश्ता
निकल
आया
सर-ए-राह
अजनबी
अपना
निकल
आया
दुआएँ
दिल
से
माँगी
तो
असर
देखो
समुंदर
से
मेरा
दरिया
निकल
आया
बची
थी
दूरी
जब
दो-चार
क़दमों
की
हमारे
बीच
में
सहरा
निकल
आया
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Aatish Indori
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कब
मैं
यारों
शराब
पीता
हूँ
मैं
तो
जन्नत
का
आब
पीता
हूँ
Aatish Indori
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