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Aatish Indori
tay hua tha yah ki ik dooje ko bhoolenge nahin
tay hua tha yah ki ik dooje ko bhoolenge nahin | तय हुआ था यह कि इक दूजे को भूलेंगे नहीं
- Aatish Indori
तय
हुआ
था
यह
कि
इक
दूजे
को
भूलेंगे
नहीं
कुछ
भी
हो
जाए
मगर
फाँसी
पे
झूलेंगे
नहीं
- Aatish Indori
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बेवफ़ाई
तो
दी
ही
जुदाई
भी
दी
जिस्म
चीरा
तो
चीरा
ख़लाई
भी
दी
दर्द
के
साथ
उसने
दवाई
भी
दी
बे-वफ़ा
क्यूँँ
हुआ
यह
सफ़ाई
भी
दी
सिर्फ़
उसने
जुदाई
दी
है
यूँँ
न
था
भूलने
की
उसे
रहनुमाई
भी
दी
उसने
खोला
नहीं
पर
पता
था
मुझे
उस
वफ़ादार
ने
बेवफ़ाई
भी
दी
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परिंदों
से
मिल-जुल
रहे
हैं
दरीचे
नए
खुल
रहे
हैं
किसी
प्याज़
की
तरह
हम
भी
परत
दर
परत
खुल
रहे
हैं
तराज़ू
से
अब
तो
हटा
लो
बहुत
वक़्त
से
तुल
रहे
हैं
महाराज
चिंतित
बहुत
हैं
परिंदों
के
पर
खुल
रहे
हैं
बचाना
है
रिश्ता
तभी
तो
लगातार
मिल-जुल
रहे
हैं
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Aatish Indori
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मेरे
पूछे
सवाल
करती
हो
ज़िंदगी
तुम
कमाल
करती
हो
यार
इन
में
उलझ
गया
हूँ
मैं
इतने
सीधे
सवाल
करती
हो
बेवफ़ाई
दी
है
वफ़ा
के
साथ
मेरा
कितना
ख़याल
करती
हो
इक
वही
रात
तो
सुनहरी
है
जिसका
तुम
जाँ
मलाल
करती
हो
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Aatish Indori
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ज़िंदगी
तेरे
लिए
मौत
से
रहमत
माँगूँ
इतनी
अच्छी
नहीं
गुज़री
है
कि
मोहलत
माँगूँ
Aatish Indori
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अनकहा
जो
रह
गया
है
वो
समझना
आँख
से
जो
बह
गया
है
वो
समझना
यूँँ
तो
वो
सुन
के
सफ़ाई
दे
रहा
है
बोले
बिन
जो
कह
गया
है
वो
समझना
दे
रहा
हूँ
मैं
मुआफ़ी
तुमको
लेकिन
जो
भरोसा
ढह
गया
है
वो
समझना
हाथ
का
मैं
पोर
छठवाँ
छू
रहा
हूँ
दर्द
कितना
रह
गया
है
वो
समझना
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Aatish Indori
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