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Aatish Indori
tu mujhe ab sagā nahin lagta
tu mujhe ab sagā nahin lagta | तू मुझे अब सगा नहीं लगता
- Aatish Indori
तू
मुझे
अब
सगा
नहीं
लगता
इसलिए
कुछ
बुरा
नहीं
लगता
यार
क्यूँँ
तूने
बेवफ़ाई
की
अब
जहाँ
में
जिया
नहीं
लगता
काम
सारे
वो
दे
रहे
हो
तुम
मेरा
जिन
में
हिया
नहीं
लगता
इश्क़
है
अल्पताप
जैसा
रोग
मौत
का
कुछ
पता
नहीं
लगता
इश्क़
का
रोग
हो
गया
जब
से
ख़ुद
को
ख़ुद
का
पता
नहीं
लगता
- Aatish Indori
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हाए
क्या
दौर-ए-ज़िंदगी
गुज़रा
वाक़िए
हो
गए
कहानी
से
Gulzar Dehlvi
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चारा-गर
तो
तभी
बचा
पाएँगे
ना
चारा-गर
की
जान
बचाओ
पहले
तो
Siddharth Saaz
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आदतन
उसके
लिए
फूल
ख़रीदे
वरना
नहीं
मालूम
वो
इस
बार
यहाँ
है
कि
नहीं
Abbas Tabish
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ग़ज़ल
पूरी
न
हो
चाहे,
मग़र
इतनी
सी
ख़्वाहिश
है
मुझे
इक
शे'र
कहना
है
तेरे
रुख़्सार
की
ख़ातिर
Siddharth Saaz
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तबक़ों
में
रंग-ओ-नस्ल
के
उलझा
के
रख
दिया
ये
ज़ुल्म
आदमी
ने
किया
आदमी
के
साथ
Bakhtiyar Ziya
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दोनों
बिलकुल
झूठे
थे
दोनों
अब
तक
ज़िंदा
हैं
Sabeen Saif
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सितारे
और
क़िस्मत
देख
कर
घर
से
निकलते
हैं
जो
बुज़दिल
हैं
मुहूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
हमें
लेकिन
सफ़र
की
मुश्किलों
से
डर
नहीं
लगता
कि
हम
बच्चों
की
सूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
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Abrar Kashif
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रखे
है
लज़्ज़त-ए-बोसा
से
मुझ
को
गर
महरूम
तो
अपने
तू
भी
न
होंटों
तलक
ज़बाँ
पहुँचा
Jurat Qalandar Bakhsh
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इतना
आसान
नहीं
होता
है
शायर
कहलाना
दर्दों
को
कहने
से
पहले
सहना
भी
पड़ता
है
Harsh saxena
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इश्क़
हुआ
है
क्या
तुझ
को
भी
तेरा
जो
होगा
सो
होगा
shaan manral
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गले
लग
झप्पी
ले,
तू
यार
तरीक़े
से
मिल
एक
मुद्दत
में
मिला
है
तू,
सलीक़े
से
मिल
Aatish Indori
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यार
ये
किस
तरह
का
मंज़र
है
हाथ
में
हर
किसी
के
ख़ंजर
है
Aatish Indori
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जानता
था
कि
तुम
दग़ा
दोगी
क्यूँँकि
तुम
कहती
थी
वफ़ा
दोगी
आपकी
तरह
ही
हसीन
है
वो
अपना
काजल
उसे
लगा
दोगी
एक
झटके
मैं
झुक
गई
तुम
तो
और
तुम
मुझको
हौसला
दोगी
उम्र
भर
आपको
दु'आ
दूँगा
अच्छे
ग़म-ख़्वार
का
पता
दोगी
जिस्म
तक
इसलिए
नहीं
पहुँचा
ज़िंदगी
भर
मुझे
दु'आ
दोगी
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Aatish Indori
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झूट
इतनी
बार
दुहराना
कि
सच
लगने
लगे
इतना
रोना-गाना-चिल्लाना
कि
सच
लगने
लगे
Aatish Indori
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जिसकी
जैसी
समझ
वहीं
पहुँचे
लोग
तह
तक
मगर
नहीं
पहुँचे
बेवफ़ाओं
की
बात
क्या
कीजे
वे
अभागे
कहीं
नहीं
पहुँचे
क्या
सुनाएँ
व्यथा
बुढ़ापे
की
घर
पहुँच
के
भी
घर
नहीं
पहुँचे
तोड़
कर
जिनसे
आए
थे
रिश्ते
घूम
फिर
कर
मगर
वहीं
पहुँचे
रूह
की
बात
कर
रही
थी
मैं
आप
लेकिन
सही
नहीं
पहुँचे
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Aatish Indori
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