jiski jaisi samajh wahin pahunchen | जिसकी जैसी समझ वहीं पहुँचे

  - Aatish Indori
जिसकीजैसीसमझवहींपहुँचे
लोगतहतकमगरनहींपहुँचे
बेवफ़ाओंकीबातक्याकीजे
वेअभागेकहींनहींपहुँचे
क्यासुनाएँव्यथाबुढ़ापेकी
घरपहुँचकेभीघरनहींपहुँचे
तोड़करजिनसेआएथेरिश्ते
घूमफिरकरमगरवहींपहुँचे
रूहकीबातकररहीथीमैं
आपलेकिनसहीनहींपहुँचे
  - Aatish Indori
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