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Aatish Alok
achha to hai bahut par man se nahin gaya hai
achha to hai bahut par man se nahin gaya hai | अच्छा तो है बहुत पर मन से नहीं गया है
- Aatish Alok
अच्छा
तो
है
बहुत
पर
मन
से
नहीं
गया
है
भीतर
गया
मगर
वो
उतने
नहीं
गया
है
मैंने
मुनाफ़िक़ों
को
बाहर
किया
है
ख़ुद
ही
वो
शख़्स
ज़िंदगी
से
ऐसे
नहीं
गया
है
- Aatish Alok
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तेरे
बग़ैर
भी
तो
ग़नीमत
है
ज़िंदगी
ख़ुद
को
गँवा
के
कौन
तेरी
जुस्तुजू
करे
Ahmad Faraz
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बस
एक
मोड़
मिरी
ज़िंदगी
में
आया
था
फिर
इस
के
बाद
उलझती
गई
कहानी
मेरी
Abbas Tabish
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कितना
भी
दर्द
पिला
दे
ख़ुदा
पी
सकता
हूँ
ज़िन्दगी
हिज्र
से
भर
दे
मिरी
जी
सकता
हूँ
हर
दफ़ा
दिल
पे
ही
खा
के
हुई
है
आदत
ये
बंद
आँखों
से
भी
हर
ज़ख़्म
को
सी
सकता
हूँ
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Faiz Ahmad
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गँवाई
किस
की
तमन्ना
में
ज़िंदगी
मैं
ने
वो
कौन
है
जिसे
देखा
नहीं
कभी
मैं
ने
Jaun Elia
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हाल
मत
पूछो
हमारी
ज़िंदगी
का
एक
चलती-फिरती
सी
दीवार
है
बस
Rachit Sonkar
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कुछ
दिन
से
ज़िंदगी
मुझे
पहचानती
नहीं
यूँँ
देखती
है
जैसे
मुझे
जानती
नहीं
Anjum Rehbar
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बद-हवा
सेी
है
बे-ख़याली
है
क्या
ये
हालत
भी
कोई
हालत
है
ज़िंदगी
से
है
जंग
शाम-ओ-सहर
मौत
से
शिकवा
है
शिकायत
है
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Chandan Sharma
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ज़ख़्म
जो
तुम
ने
दिया
वो
इस
लिए
रक्खा
हरा
ज़िंदगी
में
क्या
बचेगा
ज़ख़्म
भर
जाने
के
बाद
Azm Shakri
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ज़िंदगी
क्या
किसी
मुफ़लिस
की
क़बा
है
जिस
में
हर
घड़ी
दर्द
के
पैवंद
लगे
जाते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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जुदा
हुए
हैं
बहुत
लोग
एक
तुम
भी
सही
अब
इतनी
बात
पे
क्या
ज़िंदगी
हराम
करें
Nasir Kazmi
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तैरने
की
कश्मकश
में
डूबते
देखा
है
सबको
डूबने
वाले
को
सचमुच
तैरना
आता
है
लेकिन
Aatish Alok
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इसलिए
भी
तू
कभी
मेरा
न
होगा
जान
ले
जो
मेरा
है
दोस्त
वो
बस
मेरा
होना
चाहिए
Aatish Alok
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घाव
मेरे
हरा
करे
कोई
क्यूँ
तुम्हें
बद्दुआ
करे
कोई
कैसे
कैसों
के
हाथ
आई
है
इश्क़
तेरा
भला
करे
कोई
बे-कली
ख़त्म
होती
जाती
है
ज़ख़्म
को
फिर
हवा
करे
कोई
शर्त
है
क़त्ल
हो
मेरा
और
ये
काम
भी
बे-वफ़ा
करे
कोई
रूह
छालों
से
भर
गई
हो
जब
ज़ख़्म
से
ही
सजा
करे
कोई
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Aatish Alok
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कान्हा
बनें
आतिश
भला
क्योंकर
कहो
राधा
को
ही
रुक्मणि
बनाना
है
उसे
Aatish Alok
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लुभाता
है
कहन
मेरा
तुम्हें
तो
इसलिए
ऐ
दोस्त
मेरे
घर
के
बड़े
लोगों
से
भी
मिलता
रहा
हूँ
मैं
Aatish Alok
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