baat kuchh yuñ rahten hain so ghazal kahten hain | बात कुछ यूँँ रहतें हैं सो ग़ज़ल कहतें हैं

  - Aatish Alok
बातकुछयूँँरहतेंहैंसोग़ज़लकहतेंहैं
तुझसेेजोनयकहतेंहैसोग़ज़लकहतेंहैं
एकमिसरातकख़ुदलिखसके,हमतोबस
आँखतेरीपढ़तेहैंसोग़ज़लकहतेंहैं
वोजोपीकरमदिराहैंबहके,गिरतेहैं
दीदसेहमबहकेहैंसोग़ज़लकहतेंहैं
येहिज़्रहोकिवस्लऔ'तन्हाईसबके
सबगुज़ारेहमनेंहैंसोग़ज़लकहतेंहैं
तुमउपजहोकंटककेसोजहरहीबोदो
हमसुमनकेभवरेंहैंसोग़ज़लकहतेहैं
  - Aatish Alok
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