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Shubham Rai 'shubh'
yahaañ daagh-daar aur bhi hain
yahaañ daagh-daar aur bhi hain | यहाँ दाग़-दार और भी हैं
- Shubham Rai 'shubh'
यहाँ
दाग़-दार
और
भी
हैं
हैं
हम
तेरे
यार
और
भी
हैं
बुझा
इक
चराग़
ख़ुश
नहीं
हो
चराग़-ए-मज़ार
और
भी
हैं
- Shubham Rai 'shubh'
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अश्क
माँ
के
जो
ख़ुशी
से
गिरे
तो
हैं
मोती
और
छलके
जो
ग़मों
से
तो
लहू
हो
जाए
S M Afzal Imam
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दिलों
को
तेरे
तबस्सुम
की
याद
यूँँ
आई
कि
जगमगा
उठें
जिस
तरह
मंदिरों
में
चराग़
Firaq Gorakhpuri
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ज़िंदगी
कितनी
मसर्रत
से
गुज़रती
या
रब
ऐश
की
तरह
अगर
ग़म
भी
गवारा
होता
Akhtar Shirani
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मुद्दत
के
बाद
ख़्वाब
में
आया
था
मेरा
बाप
और
उसने
मुझ
सेे
इतना
कहा
ख़ुश
रहा
करो
Abbas Tabish
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कुछ
इस
अदास
मोहब्बत-शनास
होना
है
ख़ुशी
के
बाब
में
मुझ
को
उदास
होना
है
Rahul Jha
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ज़ोर
चलता
है
औरत
पे
सो
मर्द
ख़ुश
बीवी
पे
ख़त्म
मर्दानगी
की
समझ
Neeraj Neer
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हुनर
से
काम
लिया
पेंट
ब्रश
नहीं
तोड़ा
बना
लिया
तेरे
जैसा
ही
कोई
रंगों
से
मुझे
ये
डर
है
कि
मिल
जाएगी
तो
रो
दूँगा
मैं
जिस
ख़ुशी
को
तरसता
रहा
हूँ
बरसों
से
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Rahul Gurjar
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ग़म
और
ख़ुशी
में
फ़र्क़
न
महसूस
हो
जहाँ
मैं
दिल
को
उस
मक़ाम
पे
लाता
चला
गया
Sahir Ludhianvi
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कभी
चल
कर
रुके
होंगे,
कभी
रुक
कर
चले
होंगे
अदा-ए-ख़ुश-ख़िरामी
में
वो
जाने
कब
ढले
होंगे
सियाही
बे-सबब
आँखों
के
साहिल
पर
नहीं
आती
यक़ीनन
चश्मे-आतिश
में
कई
'आशिक़
जले
होंगे
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Wajid Husain Sahil
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हाँ
यही
मेरी
ख़ुद-शनासी
है
जिस्म
ताज़ा
है
रूह
बासी
है
सब
हँसी
को
हँसी
समझते
हैं
तुम
तो
समझो
हँसी
उदासी
है
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Armaan khan
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निगह
में
मुझे
जिसके
आना
नहीं
था
जहाँ
आना
था
ये
ज़माना
नहीं
था
बिताता
रहा
ज़िंदगी
जिस
तरह
से
मुझे
इस
तरह
से
बिताना
नहीं
था
सता
जो
रही
है
मोहब्बत
मुझे
अब
कि
कल
कह
रही
दिल
लगाना
नहीं
था
ख़ता
इतनी
बस
कर
गया
दिल-लगी
में
तुम्हीं
दिल-नशीं
हो
जताना
नहीं
था
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Shubham Rai 'shubh'
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जागना
चाहता
हूँ
जगाओ
मुझे
ज़िंदगी
की
हक़ीक़त
बताओ
मुझे
भूलना
चाहता
हूँ
मैं
इक
शख़्स
को
नाम
से
उसके
तुम
मत
बुलाओ
मुझे
इक
न
इक
दिन
मुक़द्दर
बदल
जाएगा
मुफ़लिसी
इतना
तो
मत
सताओ
मुझे
बात
आई
है
कह
दो
ग़लत
कुछ
नहीं
यार
ग़लती
तो
मेरी
बताओ
मुझे
इन
भरी
आँख
कब
तक
पुकारूँ
तुझे
मौत
आकर
गले
से
लगाओ
मुझे
रात
भर
देखने
दो
हसीं
ख़्वाब
तुम
दिन
निकलते
भले
तुम
जलाओ
मुझे
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Shubham Rai 'shubh'
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हिज्र
के
दर्द
की
अब
वो
बात
करता
कहाँ
है
दर्द
बे-रोज़गारी
का
झेल
जो
भी
रहा
है
Shubham Rai 'shubh'
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जो
नहीं
था
वो
बताया
जा
रहा
है
दोष
बस
हम
पे
लगाया
जा
रहा
है
जो
कभी
इल्ज़ाम
मेरे
सिर
नहीं
था
बे-वजह
माथे
चढ़ाया
जा
रहा
है
बैठते
जो
थे
कभी
मेरे
शजर
तल
आज
मुझको
ही
सताया
जा
रहा
है
शुभ
भरोसे
के
नहीं
हक़दार
कोई
है
सही
मुझको
भगाया
जा
रहा
है
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Shubham Rai 'shubh'
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दर्द
ले
आप
के
पास
से
आ
गए
हाँ
मुलाक़ात
कर
ख़ास
से
आ
गए
और
बोतल
उठाया
गला
तर
करूँँ
जाम
के
बाद
रख
प्यास
भी
आ
गए
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Shubham Rai 'shubh'
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