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Shubham Rai 'shubh'
bichhti nahin palken jahaan apna tumhaara hota hai
bichhti nahin palken jahaan apna tumhaara hota hai | बिछती नहीं पलकें जहाँ अपना तुम्हारा होता है
- Shubham Rai 'shubh'
बिछती
नहीं
पलकें
जहाँ
अपना
तुम्हारा
होता
है
इच्छाएँ
जब
जब
बढ़ती
हैं
तब
तब
ख़सारा
होता
है
- Shubham Rai 'shubh'
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सगी
बहनों
का
जो
रिश्ता
रिश्ता
है
उर्दू
और
हिन्दी
में
कहीं
दुनिया
की
दो
ज़िंदा
ज़बानों
में
नहीं
मिलता
Munawwar Rana
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ये
दुनिया
ग़म
तो
देती
है
शरीक-ए-ग़म
नहीं
होती
किसी
के
दूर
जाने
से
मोहब्बत
कम
नहीं
होती
Unknown
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इसी
होनी
को
तो
क़िस्मत
का
लिखा
कहते
हैं
जीतने
का
जहाँ
मौक़ा
था
वहीं
मात
हुई
Manzar Bhopali
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फ़न्न-ए-ग़ज़ल-आराई
दे
लहजे
को
सच्चाई
दे
दुनिया
है
जंगल
का
सफ़र
लछमन
जैसा
भाई
दे
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Tariq Shaheen
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हो
गए
राम
जो
तुम
ग़ैर
से
ए
जान-ए-जहाँ
जल
रही
है
दिल-ए-पुर-नूर
की
लंका
देखो
Kalb-E-Hussain Nadir
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लगा
जब
कि
दुनिया
की
पहली
ज़रूरत
मोहब्बत
है
तब
उसने
माना
यक़ीं
हो
गया
जब
मोहब्बत
ज़रूरत
है
तब
उसने
माना
वगरना
तो
ये
लोग
उसे
ख़ुद-कुशी
के
लिए
कह
चुके
थे
उसे
आइने
ने
बताया
कि
वो
ख़ूब-सूरत
है
तब
उसने
माना
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Vikram Gaur Vairagi
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इस
दौर
के
मर्दों
की
जो
की
शक्ल-शुमारी
साबित
हुआ
दुनिया
में
ख़्वातीन
बहुत
हैं
Sarfaraz Shahid
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हम
क्या
करें
अगर
न
तिरी
आरज़ू
करें
दुनिया
में
और
भी
कोई
तेरे
सिवा
है
क्या
Hasrat Mohani
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जब
आ
जाती
है
दुनिया
घूम
फिर
कर
अपने
मरकज़
पर
तो
वापस
लौट
कर
गुज़रे
ज़माने
क्यूँँ
नहीं
आते
Ibrat Machlishahri
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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आँखों
में
तू
सैलाब
आने
दे
आज
उस
प्रेयसी
को
भी
भुलाने
दे
आज
सब
सेे
तबीअत
से
मिलूँगा
ऐ
दोस्त
थोड़ी
ख़ुशी
उनको
मनाने
दे
आज
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Shubham Rai 'shubh'
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मिले
बे-सहारा
इनायत
करेंगे
कि
जब
तक
जिएँगे
मोहब्बत
करेंगे
नज़र
चाहे
जैसी
लगी
हो
तुम्हारे
नज़र
की
नज़र
से
शिकायत
करेंगे
ग़लत
राह
मुझ
को
बताया
था
जिसने
उसी
शख़्स
को
हम
हिदायत
करेंगे
कि
लहजा
हमारा
अगर
ठीक
होगा
सभी
के
दिलों
में
हुकूमत
करेंगे
दग़ाबाज़
नज़दीक
बैठें
हमारे
कि
कब
तक
हमीं
ये
शराफ़त
करेंगे
गिरेबान
अपना
निहारा
करो
तुम
कि
कब
तक
किसी
से
अदावत
करेंगे
लिए
जो
मोहब्बत
चली
आ
रही
तुम
बुरा
जो
हुआ
तो
बग़ावत
करेंगे
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Shubham Rai 'shubh'
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मुश्किल
घड़ी
में
साथ
मिलना
चाहिए
हो
बैर
फिर
भी
हाथ
मिलना
चाहिए
Shubham Rai 'shubh'
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बीतता
वक़्त
इक
ख़जाना
है
क्या
नया
साल
क्या
पुराना
है
Shubham Rai 'shubh'
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ऐसे
कुछ
मस्ताने
निकले
फ़िक्री
को
झुठलाने
निकले
मन-मौजी
हो
भौंरा
देखो
फूलों
को
बहलाने
निकले
दिल
की
मिट्टी
खोदा
जब
तो
वापस
ज़ख़्म
पुराने
निकले
पहले
आग
लगायी
सबने
फिर
सब
आग
बुझाने
निकले
ख़ूब
बनाया
रिश्ता
हमने
वक़्त
पे
सब
बेगाने
निकले
क्या
पाया
क्या
खोया
सोचा
कितने
लोग
सयाने
निकले
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Shubham Rai 'shubh'
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