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Shubham Rai 'shubh'
sabhi ke saath ham yaari nahin karte
sabhi ke saath ham yaari nahin karte | सभी के साथ हम यारी नहीं करते
- Shubham Rai 'shubh'
सभी
के
साथ
हम
यारी
नहीं
करते
मिले
दिल
फिर
तो
ग़द्दारी
नहीं
करते
हवाओं
से
मोहब्बत
करने
वाले
हम
चराग़ों
से
वफ़ादारी
नहीं
करते
ग़लत
होंगे
अगर
तो
खुल
के
बोलेंगे
किसी
की
हम
तरफ़-दारी
नहीं
करते
कहाँ
से
दुख
दरख़्तों
का
वो
समझेंगे
जो
अपने
घर
शजर-कारी
नहीं
करते
- Shubham Rai 'shubh'
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दर्द
ले
आप
के
पास
से
आ
गए
हाँ
मुलाक़ात
कर
ख़ास
से
आ
गए
और
बोतल
उठाया
गला
तर
करूँँ
जाम
के
बाद
रख
प्यास
भी
आ
गए
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जीतते
ही
तुम
कहीं
अच्छा
सा
कोई
घर
बनाओगे
काम
करने
की
जगह
तुम
घूम
कर
छुट्टी
मनाओगे
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नबी
का
घर
अगर
कोई
नहीं
है
बता
मुझको
कि
डर
कोई
नहीं
है
उड़ा
दरगाह
की
चादर
हवा
में
बता
मौला
का
दर
कोई
नहीं
है
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आए
हो
तो
आओ
बैठो
कुछ
पल
साथ
बिताओ
बैठो
कुछ
भूखे
से
तुम
लगते
हो
साथ
हमारे
खाओ
बैठो
छोड़ो
बात
पुरानी
अब
तुम
कैसे
हो
हाल
सुनाओ
बैठो
पिछले
बेंच
सा
कोई
जादू
फिर
दिखलाओ
आओ
बैठो
यार
कहाँ
तुम
रहते
हो
कुछ
तो
बोलो
बतलाओ
बैठो
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इक
सफ़र
में
तन्हा
छोड़ा
जा
चुका
है
ज़ख़्म
देकर
नाता
तोड़ा
जा
चुका
है
इंतिज़ार-ए-इश्क़
करके
क्या
मिलेगा
प्यार
से
जब
राह
छोड़ा
जा
चुका
है
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