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Rahul
dastak
dastak | "दस्तक"
- Rahul
"दस्तक"
बाहर
कौन
है
कोई
भी
तो
नहीं
ऐसा
लगा
जैसे
किसी
ने
दस्तक
दी
देखो
क्या
रह
गई
कोई
खिड़की
खुली
चलो
चराग़
बुझा
दो
रखा
है
क़रीब
ही
सोने
के
वक़्त
यहाँ
आएगा
कौन
ही
तुम
जगा
देना
मुझे
जो
सुनो
दस्तक
कोई
पानी
रख
लिया
क्या
हाँ,
और
दवाई
भी
अब
मैं
जो
सोचती
हूँ
कह
देते
हो
तुम
वही
झूठ
कहते
हैं
सब
चार
दिन
की
ज़िन्दगी
सत्तर
बरस
के
हम
साथ
हैं
आज
भी
- Rahul
जो
मेरे
साथ
मोहब्बत
में
हुई
आदमी
एक
दफा
सोचेगा
रात
इस
डर
में
गुजारी
हमने
कोई
देखेगा
तो
क्या
सोचेगा
Tehzeeb Hafi
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मुझे
अब
आइनों
की
क्या
ज़रूरत
मैं
अपने
साथ
अब
रहने
लगा
हूँ
Madan Mohan Danish
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सगी
बहनों
का
जो
रिश्ता
रिश्ता
है
उर्दू
और
हिन्दी
में
कहीं
दुनिया
की
दो
ज़िंदा
ज़बानों
में
नहीं
मिलता
Munawwar Rana
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बात
करते
हुए
बे-ख़याली
में
ज़ुल्फ़ें
खुली
छोड़
दी
हम
निहत्थों
पे
उसने
ये
कैसी
बलाएँ
खुली
छोड़
दी
साथ
जब
तक
रहे
एक
लम्हे
को
भी
रब्त
टूटा
नहीं
उसने
आँखें
अगर
बंद
कर
ली
तो
बाँहें
खुले
छोड़
दी
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Khurram Afaq
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ज़िंदगी
तुझ
से
भी
क्या
ख़ूब
त'अल्लुक़
है
मिरा
जैसे
सूखे
हुए
पत्ते
से
हवा
का
रिश्ता
Khalish Akbarabadi
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राब्ता
लाख
सही
क़ाफ़िला-सालार
के
साथ
हम
को
चलना
है
मगर
वक़्त
की
रफ़्तार
के
साथ
Qateel Shifai
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जाँ
हम
दोनों
साथ
में
अच्छे
लगते
हैं
देखो
शे'र
मुकम्मल
अच्छा
लगता
है
Neeraj Neer
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किसी
ने
ख़्वाब
में
आकर
मुझे
ये
हुक्म
दिया
तुम
अपने
अश्क
भी
भेजा
करो
दु'आओं
के
साथ
Afzal Khan
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दिवाली
भी
दिवाली
अब
नहीं
है
तुम्हारे
साथ
हर
दिन
थी
दिवाली
Tanoj Dadhich
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क्यूँँ
चलते
चलते
रुक
गए
वीरान
रास्तो
तन्हा
हूँ
आज
मैं
ज़रा
घर
तक
तो
साथ
दो
Adil Mansuri
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आ
जो
गया
हूँ
तुम्हारी
गली
में
आके
मुझे
तुम
गले
से
लगा
लो
Rahul
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वक़्त
ऐसा
भी
गुज़ारा
मैंने
जिस
में
तुझको
न
पुकारा
मैंने
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Rahul
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उसकी
दौलत
से
शनासाई
है
देर
से
बात
समझ
आई
है
Rahul
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सबकी
आँखों
में
हवस
है
उसकी
आँखों
में
हया
है
Rahul
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उसकी
दौलत
से
शनासाई
है
देर
से
बात
समझ
आई
है
तू
भी
चुपचाप
खड़ा
सुनता
है
यार
ये
तेरी
भी
रुस्वाई
है
देख
इक
तेरी
क़दर
के
हक़
में
लड़की
ने
कैसी
क़सम
खाई
है
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Rahul
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