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Rahul
sabki aankhoñ men havas hai
sabki aankhoñ men havas hai | सबकी आँखों में हवस है
- Rahul
सबकी
आँखों
में
हवस
है
उसकी
आँखों
में
हया
है
- Rahul
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उन
रस
भरी
आँखों
में
हया
खेल
रही
है
दो
ज़हर
के
प्यालों
में
क़ज़ा
खेल
रही
है
Akhtar Shirani
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हम
पे
एहसान
हैं
उदासी
के
मुस्कुराएँ
तो
शर्म
आती
है
Varun Anand
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ये
गहरा
राज़
है
इसका
बदन
को
खा
ही
जाती
है
मोहब्बत
पाक
होकर
भी
हवस
तक
आ
ही
जाती
है
ALI ZUHRI
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क्यूँँ
इक
तरफ़
निगाह
जमाए
हुए
हो
तुम
क्या
राज़
है
जो
मुझ
से
छुपाए
हुए
हो
तुम
Shakeel Badayuni
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रुख़्सार
पर
है
रंग-ए-हया
का
फ़रोग़
आज
बोसे
का
नाम
मैं
ने
लिया
वो
निखर
गए
Hakim Mohammad Ajmal Khan Shaida
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वो
अपने
चेहरे
में
सौ
आफ़ताब
रखते
हैं
इसीलिए
तो
वो
रुख़
पे
नक़ाब
रखते
हैं
Hasrat Jaipuri
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जो
तेरी
बाँहों
में
हँसती
रही
है
खेली
है
वो
लड़की
राज़
नहीं
है
कोई
पहेली
है
हाँ
मेरा
हाथ
पकड़
कर
झटक
दिया
उसने
सहारा
दे
के
बताया
कि
तू
अकेली
है
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Tajdeed Qaiser
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है
देखने
वालों
को
सँभलने
का
इशारा
थोड़ी
सी
नक़ाब
आज
वो
सरकाए
हुए
हैं
Arsh Malsiyani
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ये
भँवरे
रौशनी
खो
देंगे
अपनी
आँखों
की
अगर
चमन
में
जो
कलियाँ
नक़ाब
ओढेंगी
Shajar Abbas
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ये
हक़ीक़त
है,
मज़हका
नहीं
है
वो
बहुत
दूर
है,
जुदा
नहीं
है
तेरे
होंटों
पे
रक़्स
करता
है
राज़
जो
अब
तलक
खुला
नहीं
है
जान
ए
जांँ
तेरे
हुस्न
के
आगे
ये
जो
शीशा
है,
आइना
नहीं
है
क्यूँ
शराबोर
हो
पसीने
में
मैं
ने
बोसा
अभी
लिया
नहीं
है
उस
का
पिंदार
भी
वहीं
का
वहीं
मेरे
लब
पर
भी
इल्तेजा
नहीं
है
जो
भी
होना
था
हो
चुका
काज़िम
अब
किसी
से
हमें
गिला
नहीं
है
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Kazim Rizvi
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इस
जहाँ
भर
में
मैं
किसको
जानता
हूँ
रब
ख़ुदा
भी
मैं
तुझे
ही
मानता
हूँ
आ
गया
तेरे
बुलाने
पर
यहाँ
मैं
बस
यहाँ
इक
शख़्स
को
पहचानता
हूँ
कोई
हिस्सा
तो
मिले
मुझको
ख़ुशी
का
इस
तरह
मैं
अपने
ग़म
को
छानता
हूँ
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Rahul
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तुम
सेे
बातें
करता
हूँ
जब
लगता
है
तब
ज़िंदा
हूँ
मैं
Rahul
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तुम
अपना
वक़्त
बदलो
पर
अपनी
घड़ी
न
बदलो
तुम
Rahul
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तेरी
नफ़ासत
से
गुज़ारिश
है
मिरी
ऐसी
ही
तू
रहना
ये
ख़्वाहिश
है
मिरी
Rahul
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था
किसी
का
न
सहारा
मुझको
फिर
किया
किसने
इशारा
मुझको
नाम
तक
भूल
गया
अपना
जब
नाम
से
उसने
पुकारा
मुझको
ढलते
दिन
भी
कभी
अच्छे
थे
जब
नाव
कहती
थी
किनारा
मुझको
अब
नहीं
लगता
मुझे
जानेगी
जब
वो
देखेगी
दोबारा
मुझको
मौत
आए
तो
तरस
खाए
ख़ुद
ऐसी
हालत
से
गुज़ारा
मुझको
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Rahul
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