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Kumar Prem Pinaki
sangharsh bina jo jeeta hai
sangharsh bina jo jeeta hai | संघर्ष बिना जो जीता है
- Kumar Prem Pinaki
संघर्ष
बिना
जो
जीता
है
वो
जीता
कोई
खास
नहीं
दुनिया
में
कोई
राम
नहीं
जिसका
अपना
वनवास
नहीं
- Kumar Prem Pinaki
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हुआ
है
तुझ
से
बिछड़ने
के
बाद
ये
मालूम
कि
तू
नहीं
था
तेरे
साथ
एक
दुनिया
थी
Ahmad Faraz
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तुम
आसमान
पे
जाना
तो
चाँद
से
कहना
जहाँ
पे
हम
हैं
वहाँ
चांदनी
बहुत
कम
है
Shakeel Azmi
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ग़म
और
ख़ुशी
में
फ़र्क़
न
महसूस
हो
जहाँ
मैं
दिल
को
उस
मक़ाम
पे
लाता
चला
गया
Sahir Ludhianvi
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चलो
ऐ
हिंद
के
सैनिक
कि
लहराएँ
तिरंगा
हम
जिसे
दुनिया
नमन
करती
है
उस
पर्वत
की
चोटी
पर
ATUL SINGH
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तुम
हुस्न
की
ख़ुद
इक
दुनिया
हो
शायद
ये
तुम्हें
मालूम
नहीं
महफ़िल
में
तुम्हारे
आने
से
हर
चीज़
पे
नूर
आ
जाता
है
Sahir Ludhianvi
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दुनिया
ने
बोला
के
तुम
सेे
नहीं
होगा
अच्छा
है
मैं
थोड़ा
ऊँचा
सुनता
हूँ
Divy Kamaldhwaj
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बना
कर
हमने
दुनिया
को
जहन्नुम
ख़ुदा
का
काम
आसाँ
कर
दिया
है
Rajesh Reddy
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रात
की
भीगी-भीगी
मिट्टी
से
कुछ
उजाले
उगा
रही
होगी
मेरी
दुनिया
में
करके
अँधियारा
वो
दिवाली
मना
रही
होगी
Tanveer Ghazi
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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इतने
दुख
से
भरी
है
ये
दुनिया
आँख
खुलते
ही
आँख
भर
आए
shampa andaliib
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टूटे
हुए
को
ही
यहाँ
जुड़ने
की
चाहत
होती
है
सागर
को
मिलने
में
ही
कब
दरिया
की
आदत
होती
है
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Kumar Prem Pinaki
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इतने
चेहरे
हैं
दुनिया
में
कोई
हर
चेहरे
पर
मरता
क्या
तुम
सेे
बेहतर
यूँँ
न
सोचा
था
बस
तुम
पर
मरता
करता
क्या
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Kumar Prem Pinaki
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किसका
कितना
हिस्सा
है
किसने
कितना
पाया
है
बातें
जो
अनसुलझी
हैं
सब
भोले
की
माया
है
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Kumar Prem Pinaki
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दरिया
इतना
जो
पानी
लेकर
बहता
है
भीतर
कोई
कहानी
लेकर
बहता
है
Kumar Prem Pinaki
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जिस
दुनिया
को
हम
जीते
हैं
कोई
क्या
ऐसे
जीता
है
गर
जीता
है
तो
सोचो
फिर
मसअला
कितना
संजीदा
है
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Kumar Prem Pinaki
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