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Yogamber Agri
mujh ko us se ladna ya jeetna nahin hai bas
mujh ko us se ladna ya jeetna nahin hai bas | मुझ को उस से लड़ना या जीतना नहीं है बस
- Yogamber Agri
मुझ
को
उस
से
लड़ना
या
जीतना
नहीं
है
बस
है
वो
साथ
मेरे
ये
जीत
काफ़ी
है
मुझ
को
- Yogamber Agri
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अँधेरों
में
भले
ही
साथ
छोड़ा
था
हमारा
मगर
जब
रौशनी
लौटी
तो
साए
लौट
आए
Vikas Sahaj
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तेरे
साथ
भी
मुश्किल
पड़ता
था
तेरे
बिन
तो
गुजारा
क्या
होता
गर
तू
भी
नहीं
होता
तो
न
जाने
दोस्त
हमारा
क्या
होता
Siddharth Saaz
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दुश्मनी
कर
मगर
उसूल
के
साथ
मुझ
पर
इतनी
सी
मेहरबानी
हो
मेरे
में'यार
का
तक़ाज़ा
है
मेरा
दुश्मन
भी
ख़ानदानी
हो
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Akhtar Shumar
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क्यूँँ
चलते
चलते
रुक
गए
वीरान
रास्तो
तन्हा
हूँ
आज
मैं
ज़रा
घर
तक
तो
साथ
दो
Adil Mansuri
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अच्छी
बुरी
हर
इक
कमी
के
साथ
हैं
हम
यार
आँखों
की
नमी
के
साथ
हैं
दो
जिस्म
ब्याहे
जा
रहे
हैं
आज
भी
हम
सब
पराए
आदमी
के
साथ
हैं
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Neeraj Neer
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जाँ
हम
दोनों
साथ
में
अच्छे
लगते
हैं
देखो
शे'र
मुकम्मल
अच्छा
लगता
है
Neeraj Neer
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तुम्हें
ज़रूर
कोई
चाहतों
से
देखेगा
मगर
वो
आँखें
हमारी
कहाँ
से
लाएगा
तुम्हारे
साथ
ये
मौसम
फ़रिश्तों
जैसा
है
तुम्हारे
बा'द
ये
मौसम
बहुत
सताएगा
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Bashir Badr
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बारिशें
जाड़े
की
और
तन्हा
बहुत
मेरा
किसान
जिस्म
और
इकलौता
कंबल
भीगता
है
साथ-साथ
Parveen Shakir
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अब
मज़ीद
उस
सेे
ये
रिश्ता
नहीं
रक्खा
जाता
जिस
सेे
इक
शख़्स
का
पर्दा
नहीं
रक्खा
जाता
पढ़ने
जाता
हूँ
तो
तस्में
नहीं
बाँधे
जाते
घर
पलटता
हूँ
तो
बस्ता
नहीं
रक्खा
जाता
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Tehzeeb Hafi
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रात
हो,
चाँद
हो,
बारिश
भी
हो
और
तुम
भी
हो
ऐसा
मुमकिन
ही
नहीं
है
कि
कभी
हो
मिरे
साथ
Faiz Ahmad
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किया
था
उसने
वा'दा
उसको
याद
आ
नहीं
रहा
तो
हम
ने
अपना
इंतिज़ार
ही
तवील
कर
दिया
Yogamber Agri
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तीन
हफ़्तों
तक
मैं
भी
तो
कहाँ
से
सोया
था
तीन
बार
जब
उसने
लव
यूँ
टू
कहा
मुझ
को
Yogamber Agri
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लिखे
जो
शे'र
उस
पे
हम
वही
तुम
को
सुनाते
हैं
ये
सब
उसका
दिया
है
आज़
जो
हम
मुस्कुराते
हैं
यूँँ
तो
तहज़ीब
से
तुम
सब
ग़ज़ल
के
शे'र
सुनते
हो
तो
फिर
तुम
दाद
में
यूँँ
सीटियाँ
ही
क्यूँ
बजाते
हैं
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Yogamber Agri
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मैं
बीच
में
हूँ
तेरे
ग़म
को
छोडूं
तो
ये
लगता
है
कि
पीछे
मेरा
शव
है
आगे
मेरी
ही
मज़ार
है
Yogamber Agri
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दर्द
में
जो
रोते
होंगे
मेरे
जैसे
होते
होंगे
बे-वफ़ा
तो
वो
नहीं
है
उम्र
भर
ग़म
ढोते
होंगे
पेड़
सब
पीले
पड़े
है
उड़
गए
सब
तोते
होंगे
मेरे
आँसू
चुप
हैं
जैसे
बहने
से
वो
खोते
होंगे
काँटे
क़िस्मत
में
हैं
जैसे
काँटे
हर
पल
बूते
होंगे
हम-सफ़र
साँसें
ले
बैठा
ख़्वाब
मेरे
रोते
होंगे
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Yogamber Agri
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