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Yogamber Agri
bas do qadam ki doori pe ghar uskaa hi hai par
bas do qadam ki doori pe ghar uskaa hi hai par | बस दो क़दम की दूरी पे घर उसका ही है पर
- Yogamber Agri
बस
दो
क़दम
की
दूरी
पे
घर
उसका
ही
है
पर
उन
रास्तों
से
अन
बन
हैं
बहुत
सी
मेरी
- Yogamber Agri
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हिज्र
की
रातें
इतनी
भारी
होती
हैं
जैसे
छाती
पर
ऐरावत
बैठा
हो
Tanoj Dadhich
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ये
सानिहा
भी
शब-ए-हिज्र
आ
पड़ा
हम
पर
तेरा
ख़्याल
तो
आया
तेरी
तलब
न
हुई
Subhan Asad
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तड़पना
हिज्र
तक
सीमित
नहीं
है
उसे
दुल्हन
भी
बनते
देखना
है
Anand Verma
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वो
फ़िराक़
और
वो
विसाल
कहाँ
वो
शब-ओ-रोज़-ओ-माह-ओ-साल
कहाँ
Mirza Ghalib
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हिज्र
में
ख़ुद
को
तसल्ली
दी
कहा
कुछ
भी
नहीं
दिल
मगर
हँसने
लगा
आया
बड़ा
कुछ
भी
नहीं
Afkar Alvi
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कैसी
बिपता
पाल
रखी
है
क़ुर्बत
की
और
दूरी
की
ख़ुशबू
मार
रही
है
मुझ
को
अपनी
ही
कस्तूरी
की
Naeem Sarmad
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हिज्र
में
अब
वो
रात
हुई
है
जिस
में
मुझको
ख़्वाबों
में
रेल
की
पटरी,
चाकू,
रस्सी,
बहती
नदियाँ
दिखती
हैं
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Dipendra Singh 'Raaz'
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मिरी
ज़िंदगी
तो
गुज़री
तिरे
हिज्र
के
सहारे
मिरी
मौत
को
भी
प्यारे
कोई
चाहिए
बहाना
Jigar Moradabadi
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गुजर
चुकी
जुल्मते
शब-ए-हिज्र,
पर
बदन
में
वो
तीरगी
है
मैं
जल
मरुंगा
मगर
चिरागों
के
लो
को
मध्यम
नहीं
करूँगा
यह
अहद
लेकर
ही
तुझ
को
सौंपी
थी
मैंने
कलबौ
नजर
की
सरहद
जो
तेरे
हाथों
से
कत्ल
होगा
मैं
उस
का
मातम
नहीं
करूँगा
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Tehzeeb Hafi
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महीनों
तक
रहा
करते
थे
सब
मेहमान
आँखों
में,
मगर
अब
ख़्वाब
भी
आते
नहीं
वीरान
आँखों
में
ज़मान
ए
हिज्र
कहने
को
रिवाज़
ए
इश्क़
ही
तो
है,
मगर
क्या
क्या
नहीं
होता
है
इस
दौरान
आँखों
में
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Darpan
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ज़ख़्म
लगने
पे
किसी
को
हम
न
देखें
इतनी
भी
तिरछी
नज़र
हम
में
नहीं
है
Yogamber Agri
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तुम्हारा
क्या
मुझे
छोड़ा
और
चल
दिए
पर
मेरा
ये
दिल
वहीं
था
है
और
वहीं
रहेगा
Yogamber Agri
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मैं
कहता
छोड़
मुझको
तुम
गई
तो
मर
मैं
जाऊँगा
तो
होंठो
पर
मेरे
वो
हाथ
रखना
याद
आता
है
Yogamber Agri
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उस
की
बे-वफ़ाई
मुझ
को
समझ
में
आई
जब
मैं
ने
ख़ुद
को
उसकी
हालत
पे
रख
के
ये
सोचा
Yogamber Agri
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इल्म
था
हम
को
हमारा
बॉन्ड
टूटेगा
ही
इक
दिन
उस
को
अक्सर
कार्बन
का
बॉन्ड
आता
था
बनाना
Yogamber Agri
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