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Vivek Vistar
koi bhi ummeed unse ham laga sakte nahin
koi bhi ummeed unse ham laga sakte nahin | कोई भी उम्मीद उन सेे हम लगा सकते नहीं
- Vivek Vistar
कोई
भी
उम्मीद
उन
सेे
हम
लगा
सकते
नहीं
जो
मुहब्बत
से
ज़रा
भी
मुस्कुरा
सकते
नहीं
- Vivek Vistar
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हर
सुब्ह
उठ
के
इसको
मैं
हूँ
चूमता
चाय
है
जैसे
ये
कोई
सौतन
तेरी
RAJAT AWASTHI
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किस
से
उम्मीद
करें
कोई
इलाज-ए-दिल
की
चारा-गर
भी
तो
बहुत
दर्द
का
मारा
निकला
Lutf Ur Rahman
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शाख़-ए-उम्मीद
से
कड़वा
भी
उतर
सकता
हूँ
रोज़
ये
बात
मुझे
सब्र
का
फल
कहता
है
Rakib Mukhtar
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चलो
माना
कि
रोना
मसअले
का
हल
नहीं
लेकिन
करे
भी
क्या
कोई
जब
ख़त्म
हर
उम्मीद
हो
जाए
Bhaskar Shukla
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न
कोई
वा'दा
न
कोई
यक़ीं
न
कोई
उमीद
मगर
हमें
तो
तिरा
इंतिज़ार
करना
था
Firaq Gorakhpuri
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लो
आज
हमने
तोड़
दिया
रिश्ता-ए-उम्मीद
लो
अब
कभी
गिला
न
करेंगे
किसी
से
हम
Sahir Ludhianvi
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ये
दाग़
दाग़
उजाला
ये
शब-गज़ीदा
सहर
वो
इंतिज़ार
था
जिस
का
ये
वो
सहर
तो
नहीं
Faiz Ahmad Faiz
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मैं
अब
किसी
की
भी
उम्मीद
तोड़
सकता
हूँ
मुझे
किसी
पे
भी
अब
कोई
ए'तिबार
नहीं
Jawwad Sheikh
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ये
सच
है
नफ़रतों
की
आग
ने
सब
कुछ
जला
डाला
मगर
उम्मीद
की
ठण्डी
हवाएँ
रोज़
आती
हैं
Munawwar Rana
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मुझे
दुश्मन
से
भी
ख़ुद्दारी
की
उम्मीद
रहती
है
किसी
का
भी
हो
सर
क़दमों
में
सर
अच्छा
नहीं
लगता
Javed Akhtar
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आपसे
पूछनी
है
यही
बात
बस
ख़ुद
से
भूले
हमें
या
भुलाया
गया
Vivek Vistar
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तीर
गहरा
लगे
ये
ज़रूरी
नहीं
उस
सेे
तो
ठीक
है
जो
लगा
ही
नहीं
Vivek Vistar
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मियाँ
तुम
इस
तरह
सुन
तो
रहे
हो
पर
डुबा
देंगी
तुम्हें
विस्तार
की
बातें
Vivek Vistar
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लोग
मज़हब
के
लिए
लड़कर
बहाते
हैं
लहू
मुल्क
की
ख़ातिर
लहू
लेकिन
बहा
सकते
नहीं
Vivek Vistar
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टूटा
दिल
तोड़ा
कैसे
जाए,
तुम
सेे
सीखा
है
अपनों
को
छोड़ा
कैसे
जाए,
तुम
सेे
सीखा
है
सबके
मुआफ़िक़
बातें
करना
तो
आता
था
लेकिन
बात
का
रुख़
मोड़ा
कैसे
जाए,
तुम
सेे
सीखा
है
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Vivek Vistar
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