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Vivek Vistar
teer gahra lage ye zaroori nahin
teer gahra lage ye zaroori nahin | तीर गहरा लगे ये ज़रूरी नहीं
- Vivek Vistar
तीर
गहरा
लगे
ये
ज़रूरी
नहीं
उस
सेे
तो
ठीक
है
जो
लगा
ही
नहीं
- Vivek Vistar
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ठीक
से
ज़ख़्म
का
अंदाज़ा
किया
ही
किसने
बस
सुना
था
कि
बिछड़ते
हैं
तो
मर
जाते
हैं
Shariq Kaifi
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जितने
भी
हैं
ज़ख़्म
तुम्हारे
सिल
देगी
होटल
में
खाने
का
आधा
बिल
देगी
सीधे
मुँह
जो
बात
नहीं
करती
है
जो
तुमको
लगता
है
वो
लड़की
दिल
देगी
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Shadab Asghar
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तुम्हारी
याद
के
जब
ज़ख़्म
भरने
लगते
हैं
किसी
बहाने
तुम्हें
याद
करने
लगते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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जो
सारे
ज़ख़्म
मेरे
भर
दिया
करता
उसी
के
नाम
का
ख़ंजर
बनाया
है
Parul Singh "Noor"
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कोई
मेरे
दिल
से
पूछे
तिरे
तीर-ए-नीम-कश
को
ये
ख़लिश
कहाँ
से
होती
जो
जिगर
के
पार
होता
Mirza Ghalib
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अक्सर
ही
ज़ख़्म
इश्क़
में
पाले
हैं
औरतें
पर
कितने
टूटे
मर्द
सँभाले
हैं
औरतें
Abhishar Geeta Shukla
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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ये
बात
अभी
सबको
समझ
आई
नहीं
है
दीवाना
है
दीवाना
तमन्नाई
नहीं
है
दिल
मेरा
दुखाकर
ये
मुझे
तेरा
मनाना
मरहम
है
फ़क़त
ज़ख़्म
की
भरपाई
नहीं
है
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Vikram Gaur Vairagi
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दूर
इक
सितारा
है
और
वो
हमारा
है
आँख
तक
नहीं
लगती
कोई
इतना
प्यारा
है
छू
के
देखना
उसको
क्या
अजब
नज़ारा
है
तीर
आते
रहते
थे
फूल
किसने
मारा
है
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Kafeel Rana
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देखा
जो
खा
के
तीर
कमीं-गाह
की
तरफ़
अपने
ही
दोस्तों
से
मुलाक़ात
हो
गई
Hafeez Jalandhari
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तेरी
तस्वीर
नज़रों
में
ज़रा
उतरे
मेरे
सिर
से
भला
कैसे
नशा
उतरे
Vivek Vistar
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उमड़
कर
रह
गया
बावजूद
इसके
आँख
का
वो
समुंदर
बहा
ही
नहीं
Vivek Vistar
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भरोसा
इस
ज़माने
में
करें
किस
पर
टके
में
बिक
रहीं
अख़बार
की
बातें
Vivek Vistar
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भूला
बिसरा
याद
नहीं
है
सारा
क़िस्सा
याद
नहीं
है
उस
की
आँखें
याद
है
मुझ
को
उस
का
चेहरा
याद
नहीं
है
बादल
नदियों
पर
बरसेगा
उस
को
सहरा
याद
नहीं
है
उतना
तो
मैं
भूल
गया
हूँ
तुम
को
जितना
याद
नहीं
है
मेरा
मोल
बताने
वाले
तुझ
को
अपना
याद
नहीं
है
तेरे
झूठ
की
सच्चाई
में
कितना
उजड़ा
याद
नहीं
है
पिछला
शे'र
मुक़र्रर
कर
दो
अगला
मिसरा
याद
नहीं
है
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Vivek Vistar
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लड़खड़ा
कर
तू
गिरा
तो
क्यूँ
रहे
मायूस
ख़ुद
से
कर
परीक्षा
उन
परों
की
जो
अभी
खोले
नहीं
थे
Vivek Vistar
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