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Vishakt ki Kalam se
nahin jo paas tere dil kisi se maang le phir
nahin jo paas tere dil kisi se maang le phir | नहीं जो पास तेरे दिल किसी से माँग ले फिर
- Vishakt ki Kalam se
नहीं
जो
पास
तेरे
दिल
किसी
से
माँग
ले
फिर
किसी
की
याद
में
जीना
तुझे
आ
जाएगा
तब
- Vishakt ki Kalam se
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जितने
भी
हैं
ज़ख़्म
तुम्हारे
सिल
देगी
होटल
में
खाने
का
आधा
बिल
देगी
सीधे
मुँह
जो
बात
नहीं
करती
है
जो
तुमको
लगता
है
वो
लड़की
दिल
देगी
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Shadab Asghar
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झुकी
झुकी
सी
नज़र
बे-क़रार
है
कि
नहीं
दबा
दबा
सा
सही
दिल
में
प्यार
है
कि
नहीं
Kaifi Azmi
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तुम्हारे
ख़त
को
जलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
ये
दिल
बाहर
निकलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
तुम्हारा
फ़ैसला
है
पास
रुकना
या
नहीं
रुकना
मेरी
क़िस्मत
बदलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
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Tanoj Dadhich
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ज़िंदगी
भर
के
लिए
दिल
पे
निशानी
पड़
जाए
बात
ऐसी
न
लिखो,
लिख
के
मिटानी
पड़
जाए
Aadil Rasheed
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शाम-ए-फ़िराक़
अब
न
पूछ
आई
और
आ
के
टल
गई
दिल
था
कि
फिर
बहल
गया
जाँ
थी
कि
फिर
सँभल
गई
Faiz Ahmad Faiz
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आप
चाहें
तो
कहीं
और
भी
रह
सकते
हैं
दिल
हमारा
है
तो
मर्ज़ी
भी
हमारी
होगी
Shamsul Hasan ShamS
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दिल
में
न
हो
जुरअत
तो
मोहब्बत
नहीं
मिलती
ख़ैरात
में
इतनी
बड़ी
दौलत
नहीं
मिलती
Nida Fazli
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निभेगी
किस
तरह
दिल
सोचता
है
अजब
लड़की
है
जब
देखो
ख़फ़ा
है
Fuzail Jafri
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दिल
को
तेरी
चाहत
पे
भरोसा
भी
बहुत
है
और
तुझ
से
बिछड़
जाने
का
डर
भी
नहीं
जाता
Ahmad Faraz
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काम
अब
कोई
न
आएगा
बस
इक
दिल
के
सिवा
रास्ते
बंद
हैं
सब
कूचा-ए-क़ातिल
के
सिवा
Ali Sardar Jafri
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टूट
जाने
की
हदों
को
पार
करके
सोचता
हूँ
काश
मैं
भी
टूट
जाता
छोड़
देता
मैं
समुंदर
पार
करना
हाथ
जो
ग़म
का
वहीं
पर
छूट
जाता
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Vishakt ki Kalam se
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वही
जो
मौत
से
पहले
हमारी
मौत
होती
है
नहीं
होती
हैं
आँखें
नम
मगर
इक
सौत
होती
है
Vishakt ki Kalam se
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उठी
मूॅंछें
बढ़ी
दाढ़ी
यही
हूॅं
मैं
तुम्हें
लगता
नहीं
था
जो
वही
हूॅं
मैं
सही
हो
तुम
शरीफ़ों
में
नहीं
हूॅं
मैं
ग़लत
कह
दो
अगर
मुझको
वही
हूॅं
मैं
मिरे
जैसे
दिखें
तुमको
नहीं
वो
मैं
सही
हो
तुम
मगर
जब
तक
सही
हूॅं
मैं
दिखूॅं
ख़ूॅंखार
तो
बेशक
नहीं
हूॅं
मैं
कभी
जो
था
यहाँ
बेकार
वही
हूॅं
मैं
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Vishakt ki Kalam se
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भुजाओं
की
दिखा
ताक़त
दिखा
दे
कौन
है
तू
ग़लत
तो
है
ज़माना
ये
मगर
क्यूँ
मौन
है
तू
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तुम्हारी
सोच
में
मिलते
नहीं
हम
हमारी
बात
ही
कुछ
और
है
अब
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