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Gulshan
dil ki ik duniya basaakar chal diye
dil ki ik duniya basaakar chal diye | दिल की इक दुनिया बसाकर चल दिए
- Gulshan
दिल
की
इक
दुनिया
बसाकर
चल
दिए
अपना
ग़म
मुझको
थमाकर
चल
दिए
- Gulshan
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अपना
सब
कुछ
हार
के
लौट
आए
हो
न
मेरे
पास
मैं
तुम्हें
कहता
भी
रहता
था
कि
दुनिया
तेज़
है
Tehzeeb Hafi
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जिसकी
ख़ातिर
हम
भुला
बैठे
हैं
दुनिया
दोस्तों
से
ही
उन्हें
फ़ुर्सत
नहीं
है
Shashank Shekhar Pathak
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हो
गए
राम
जो
तुम
ग़ैर
से
ए
जान-ए-जहाँ
जल
रही
है
दिल-ए-पुर-नूर
की
लंका
देखो
Kalb-E-Hussain Nadir
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परतव
से
जिस
के
आलम-ए-इम्काँ
बहार
है
वो
नौ-बहार-ए-नाज़
अभी
रहगुज़र
में
है
Ali Sardar Jafri
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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इसी
होनी
को
तो
क़िस्मत
का
लिखा
कहते
हैं
जीतने
का
जहाँ
मौक़ा
था
वहीं
मात
हुई
Manzar Bhopali
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ये
दुनिया
ग़म
तो
देती
है
शरीक-ए-ग़म
नहीं
होती
किसी
के
दूर
जाने
से
मोहब्बत
कम
नहीं
होती
Unknown
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एक
हमें
आवारा
कहना
कोई
बड़ा
इल्ज़ाम
नहीं
दुनिया
वाले
दिल
वालों
को
और
बहुत
कुछ
कहते
हैं
Habib Jalib
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नहीं
दुनिया
को
जब
परवाह
हमारी
तो
फिर
दुनिया
की
परवाह
क्यूँँ
करें
हम
Jaun Elia
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मज़ा
चखा
के
ही
माना
हूँ
मैं
भी
दुनिया
को
समझ
रही
थी
कि
ऐसे
ही
छोड़
दूँगा
उसे
Rahat Indori
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दुखों
को
सुख
बताया
जा
रहा
है
यूँँ
रोते
को
हँसाया
जा
रहा
है
दुखी
लाचार
बेबस
लोग
हैं
जो
उन्हें
बेहद
सताया
जा
रहा
है
जहाँ
पर
बाँटते
हैं
दर्द
काँटे
वहाँ
पर
गुल
खिलाया
जा
रहा
है
उजाले
के
लिए
दीपक
जलाकर
अँधेरे
को
मिटाया
जा
रहा
है
मिले
थे
ज़ख़्म
जिसके
प्यार
में
ये
उसे
दिल
में
बसाया
जा
रहा
है
हटाने
थे
सभी
सन्देह
'गुलशन'
भरोसा
क्यूँ
उठाया
जा
रहा
है
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Gulshan
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मौसम
में
वो
बात
नहीं
है
तेरा
मेरा
साथ
नहीं
है
सूखी
आँखें
दरिया
ख़ाली
यानी
अब
बरसात
नहीं
है
तू
भी
सबके
जैसी
निकली
तुझ
में
भी
कुछ
बात
नहीं
है
तू
दरिया
है
मैं
हूँ
तिनका
मेरी
कुछ
औक़ात
नहीं
है
इश्क़
तो
हर
मज़हब
को
माने
इश्क़
की
कोई
ज़ात
नहीं
है
कटी
पतंगें
लूटे
कैसे
'गुल'
के
लंबे
हाथ
नहीं
है
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Gulshan
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अपना
किरदार
हम
दिखा
देंगे
चोट
खाकर
भी
मुस्कुरा
देंगे
तेरे
ख़्वाबों
में
ऐ
मेरे
हमदम
रंग
उल्फ़त
के
हम
मिला
देंगे
इश्क़
की
रहगुज़र
में
आ
जाओ
अपनी
पलकों
को
हम
बिछा
देंगे
उनको
लाओ
बुला
के
ऐ
लोगों
वो
ही
बीमार
को
दवा
देंगे
सुनके
दीवाने
वो
हुए
जिसको
वो
ग़ज़ल
तुमको
हम
सुना
देंगे
उठके
जाने
की
ज़िद
करोगे
तब
तुमको
अपनी
क़सम
दिला
देंगे
जीत
लो
दिल
अगर
गरीबों
के
दामन-ए-दिल
से
यह
दु'आ
देंगे
साथ
तेरा
अगर
मिले
'गुलशन'
आशियाँ
प्यार
से
सजा
देंगे
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Gulshan
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ख़ुदा
ही
जानता
है
अपनी
मर्ज़ी
वो
किस
कतरे
को
कब
दरिया
करेगा
Gulshan
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ख़्वाब
में
ही
आना
जाना
रह
गया
याद
बस
गुज़रा
जमाना
रह
गया
मैं
हूँ
तन्हा
सामने
है
आइना
अब
न
कुछ
बाक़ी
बहाना
रह
गया
ले
गया
यादों
के
मौसम
साथ
वो
मुझपे
बस
इक
ख़त
पुराना
रह
गया
रूह
कब
की
जा
चुकी
है
उसके
साथ
अब
तो
बस
ये
तन
जलाना
रह
गया
जोड़कर
खुशियाँ
बनाया
घोंसला
उड़
गया
पंछी
ठिकाना
रह
गया
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Gulshan
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