pakad ke haath koi ab agar mumkin ye ho paa.e | पकड़ के हाथ कोई अब अगर मुमकिन ये हो पाए

  - Umashankar Lekhwar
पकड़केहाथकोईअबअगरमुमकिनयेहोपाए
हमेंयादोंभरीतन्हाइयोंसेदूरलेजाए
बहुतचाहाकहींहमकोसुकूँफिरमिलनहींपाया
उन्हेंख़ुदपेगुमाँहैऔरहमहैंचैनखोआए
हमेंअबयादआतीहैकिसीकीफूलसीआँखें
जहाँसबचैनखोकरकेकिसीकेख़्वाबथेलाए
हमेंतुमनेकभीमौक़ादियाहोताअगरजानाँ
तुम्हेंहमरातभरतकतेमगरवोपलनहींआए
कभीहरख़्वाबमेंथीतुमयक़ीननझूठलगताहै
हमेंभीथीमोहब्बतपरकभीहमकहनहींपाए
कभीयूँँहीअकेलेमेंमुझेतुमयादआतेहो
सुकूँमैंचाहताहूँकौनहैतुमसेाजोमिलजाए
हमेशाहीतुम्हेंजबभीकभीमैंभूलपाताहूँ
दिखाकेख़्वाबफिरमुझकोमेरादिलरोज़बहकाए
  - Umashankar Lekhwar
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