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Tiwari Jitendra
kabhi amma kabhi mummy kabhi maate bulaata hooñ
kabhi amma kabhi mummy kabhi maate bulaata hooñ | कभी अम्मा कभी मम्मी कभी माते बुलाता हूँ
- Tiwari Jitendra
कभी
अम्मा
कभी
मम्मी
कभी
माते
बुलाता
हूँ
बड़ा
नादान
लड़का
हूँ
सदा
उनको
सताता
हूँ
- Tiwari Jitendra
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कमाता
हूँ
मैं
कितना
सोच
लेना
बाद
में
ये
सब
अभी
तो
बस
यही
काफ़ी
है
माँ
के
पास
रहता
हूँ
Tanoj Dadhich
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एक
मुद्दत
से
मिरी
माँ
नहीं
सोई
'ताबिश'
मैं
ने
इक
बार
कहा
था
मुझे
डर
लगता
है
Abbas Tabish
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आज
फिर
माँ
मुझे
मारेगी
बहुत
रोने
पर
आज
फिर
गाँव
में
आया
है
खिलौने
वाला
Nawaz Zafar
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मोहब्बत
का
सुबूत
अब
और
क्या
दें
तुम्हारी
माँ
को
माँ
कहने
लगे
हैं
Shadab Asghar
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मुद्दतों
ब'अद
मुयस्सर
हुआ
माँ
का
आँचल
मुद्दतों
ब'अद
हमें
नींद
सुहानी
आई
Iqbal Ashhar
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बूढ़ी
माँ
का
शायद
लौट
आया
बचपन
गुड़ियों
का
अम्बार
लगा
कर
बैठ
गई
Irshad Khan Sikandar
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माँ
के
आँसू
को
समझता
हूँ
मुक़द्दस
इतना
बस
उन्हें
चूम
ले
अफ़ज़ल
तो
वज़ू
हो
जाए
S M Afzal Imam
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मुझे
मालूम
है
माँ
की
दुआएँ
साथ
चलती
हैं
सफ़र
की
मुश्किलों
को
हाथ
मलते
मैंने
देखा
है
Aalok Shrivastav
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मुझे
आँखें
दिखाकर
बोलती
है
चुप
रहो
भैया
बहिन
छोटी
भले
हो
बात
वो
अम्मा
सी
करती
है
Divy Kamaldhwaj
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मुझपे
पड़ती
नहीं
बलाओं
की
धूप
सर
पे
साया-फ़िगन
है
माँ
की
दु'आ
Amaan Haider
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ख़ुदास
दिल
लगा
कर
जीत
मिलती
है
कभी
सर
को
झुका
कर
जीत
मिलती
है
Tiwari Jitendra
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पुराने
ज़ख़्म
को
ज़िन्दा
न
कर
बैठे
किसी
के
साथ
में
रिश्ता
न
कर
बैठे
मुझे
मेरी
तरह
का
चाहिए
दुश्मन
अना
के
साथ
समझौता
न
कर
बैठे
हया
अच्छी
मगर
इतनी
नहीं
साहब
मुझे
ही
देखकर
पर्दा
न
कर
बैठे
हुनर
है
एक
ही
ग़म
बाँटने
का
बस
मुहब्बत
फिर
हमें
तन्हा
न
कर
बैठे
बला
लेकर
'तिवारी'
घूमता
है
जाँ
हमारा
जोश
वो
ठंडा
न
कर
बैठे
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Tiwari Jitendra
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आज
मण्डप
में
बिठाया
है
मुझे
कल
तलक
मर
जाएगा
ये
ग़म
मिरा
Tiwari Jitendra
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कभी
दिल
लग
गया
था
कुछ
बरस
पहले
किताबों
से
गुलाबों
को
किताबों
में
अगर
रखना
यही
कहना
Tiwari Jitendra
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सोचता
ही
रहा
क्या
हुआ
क्यूँ
हुआ
बन
गई
वो
दवा
दिल
अलग
कर
दिया
रात
भर
चाँद
को
मैं
निहारा
किया
जल
गया
फिर
समा
दिल
अलग
कर
दिया
प्यार
माँगा
तभी
उसने
नंबर
दिया
फ़ोन
की
थी
ख़ता
दिल
अलग
कर
दिया
मय
तिवारी
पे
चढ़ने
लगी
है
सखी
एक
बोसा
दिया
दिल
अलग
कर
दिया
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Tiwari Jitendra
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