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Tiwari Jitendra
zamaana jawaani ki taameer hai bas
zamaana jawaani ki taameer hai bas | ज़माना जवानी की तामीर है बस
- Tiwari Jitendra
ज़माना
जवानी
की
तामीर
है
बस
ग़ज़ल
इक
मुहब्बत
की
तहरीर
है
बस
चलो
आज
उसको
नहीं
रोकते
हैं
उसे
हम
मिले
हैं
ये
तक़दीर
है
बस
जिसे
कह
रहा
है
तू
नादान
बच्चा
क़लम
की
जगह
हाथ
शमशीर
है
बस
कभी
मात
को
जीत
में
वो
बदल
दे
पलट
दे
जो
तख़्ता
वही
वीर
है
बस
कई
सारे
दुश्मन
अकेला
तिवारी
मेरे
पास
में
सिर्फ़
इक
तीर
है
बस
- Tiwari Jitendra
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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यदि
अंधकार
से
लड़ने
का
संकल्प
कोई
कर
लेता
है
तो
एक
अकेला
जुगनू
भी
सब
अन्धकार
हर
लेता
है
Balkavi Bairagi
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नाप
रहा
था
एक
उदासी
की
गहराई
हाथ
पकड़कर
वापस
लायी
है
तन्हाई
वस्ल
दिनों
को
काफ़ी
छोटा
कर
देता
है
हिज्र
बढ़ा
देता
है
रातों
की
लम्बाई
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Tanoj Dadhich
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चालीस
साल
इस
को
अकेले
निभाएँगे
ये
चार
साल
का
जो
तअल्लुक़
था
दरमियाँ
Afzal Ali Afzal
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एक
महफ़िल
में
कई
महफ़िलें
होती
हैं
शरीक
जिस
को
भी
पास
से
देखोगे
अकेला
होगा
Nida Fazli
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एक
अरसे
तक
अकेले
हम
चले
फिर
हमारा
नाम
चलने
लग
गया
Tanoj Dadhich
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तमाम
नाख़ुदा
साहिल
से
दूर
हो
जाएँ
समुंदरों
से
अकेले
में
बात
करनी
है
Tehzeeb Hafi
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एक
अकेले
की
ख़ातिर
जब
दो
कप
कॉफी
में
चीनी
आज
मिलाते
हैं
तो
रो
देते
हैं
हम
Atul K Rai
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ऐब
हज़ारों
दिखते
हैं
मुझको
मेरी
परछाई
में
यानी
शीशे
से
मिलता
हूँ
अक्सर
मैं
तन्हाई
में
Ravi 'VEER'
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मैं
अपने
चारों
तरफ़
हूँ
और
इस
तरह
का
हुजूम
अजीब
किस्म
की
तन्हाई
साथ
लाता
है
Abhishek shukla
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हम
अदावत
कर
रहें
हैं
अब
कि
अपनी
रूह
से
तुम
मोहब्बत
के
हमें
क़िस्से
सुनाते
रोज़
हो
Tiwari Jitendra
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उसी
के
साथ
जाना
चाहता
था
उसे
अब
मैं
सताना
चाहता
था
अभी
तक
बह
रहा
है
ख़ून
मेरा
निशाँ
उसके
मिटाना
चाहता
था
उसी
से
दुश्मनी
करने
लगा
था
जिसे
मैं
घर
में
लाना
चाहता
था
पलट
कर
देखता
था
आँख
भर
कर
मुझे
तो
वो
डुबाना
चाहता
था
'तिवारी'
को
किसी
से
डर
नहीं
था
उसे
मैं
याद
आना
चाहता
था
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Tiwari Jitendra
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आज
मण्डप
में
बिठाया
है
मुझे
कल
तलक
मर
जाएगा
ये
ग़म
मिरा
Tiwari Jitendra
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अब
पढ़ाई
लिखाई
से
मन
भर
गया
ये
रिलेशन
समझ
यार
पाते
नहीं
Tiwari Jitendra
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उसी
से
दुश्मनी
करने
लगा
था
जिसे
मैं
घर
में
लाना
चाहता
था
Tiwari Jitendra
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