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Saurabh Mehta 'Alfaaz'
musannif hooñ magar kirdaar hota ja raha hooñ
musannif hooñ magar kirdaar hota ja raha hooñ | मुसन्निफ़ हूँ मगर किरदार होता जा रहा हूँ
- Saurabh Mehta 'Alfaaz'
मुसन्निफ़
हूँ
मगर
किरदार
होता
जा
रहा
हूँ
तसल्लुत
अपने
ही
लिक्खे
पे
खोता
जा
रहा
हूँ
कहानी
में
तो
इक
अंजाम
अच्छा
ही
लिखा
था
उसी
अंजाम
पर
पैहम
मैं
रोता
जा
रहा
हूँ
- Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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तमाम
जिस्म
को
आँखें
बना
के
राह
तको
तमाम
खेल
मुहब्बत
में
इंतिज़ार
का
है
Munawwar Rana
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चाँद
सा
मिस्रा
अकेला
है
मिरे
काग़ज़
पर
छत
पे
आ
जाओ
मिरा
शे'र
मुकम्मल
कर
दो
Bashir Badr
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अजीब
दर्द
का
रिश्ता
था
सब
के
सब
रोए
शजर
गिरा
तो
परिंदे
तमाम
शब
रोए
Tariq Naeem
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अंजाम
उसके
हाथ
है
आग़ाज़
करके
देख
भीगे
हुए
परों
से
ही
परवाज़
करके
देख
Nawaz Deobandi
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घर
की
इस
बार
मुकम्मल
मैं
तलाशी
लूँगा
ग़म
छुपा
कर
मिरे
माँ
बाप
कहाँ
रखते
थे
Unknown
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तमाम
होश
ज़ब्त
इल्म
मस्लहत
के
बाद
भी
फिर
इक
ख़ता
मैं
कर
गया
था
माज़रत
के
बाद
भी
Pallav Mishra
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दुश्मनी
लाख
सही
ख़त्म
न
कीजे
रिश्ता
दिल
मिले
या
न
मिले
हाथ
मिलाते
रहिए
Nida Fazli
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वो
भी
आख़िर
तिरी
ता'रीफ़
में
ही
ख़र्च
हुआ
मैं
ने
जो
वक़्त
निकाला
था
शिकायत
के
लिए
Azhar Nawaz
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दिल
के
तमाम
ज़ख़्म
तेरी
हाँ
से
भर
गए
जितने
कठिन
थे
रास्ते
वो
सब
गुज़र
गए
Kumar Vishwas
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अब
बिछड़ने
पर
समझ
पाते
हैं
हम
इक
दूसरे
को
इम्तिहाँ
के
ख़त्म
हो
जाने
पे
हल
याद
आ
रहा
है
Nishant Singh
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होने
दो
तसल्ली
से
अभी
ये
गुफ़्तगू
जाने
कब
हो
ऐसे
ज़िन्दगी
फिर
रू-ब-रू
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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ये
मर्ज़ी
ख़ुद
उसी
की
है,
मुझे
क्या
वो
जिधर
जाए
गुज़ारे
ज़िन्दगी,
गुज़रे
यहाँ
से,
या
गुज़र
जाए
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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रंजिशों
की
आतिशों
में
सारी
बस्ती
जल
रही
थी
वो
फ़क़त
अपनी
ही
ज़िद
में
घर
को
फूँके
जा
रहे
थे
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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अच्छा
था
जो
छोड़
गए
कूचा-ए-दिल
दीवाने
का
कौन
भला
यूँँ
घर
लेता
है
बीहड़
में,
वीरानों
में
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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इतनी
मुश्किल
दुनियादारी,
और
फिर
उस
पर
तेरे
ग़म
सारी
दुनिया
छोड़
के
आए,
मेरे
ही
सर
तेरे
ग़म
Saurabh Mehta 'Alfaaz'
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