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Tarun Bharadwaj
zindagi is tarah kuchh apni basar hoti rahi
zindagi is tarah kuchh apni basar hoti rahi | ज़िंदगी इस तरह कुछ अपनी बसर होती रही
- Tarun Bharadwaj
ज़िंदगी
इस
तरह
कुछ
अपनी
बसर
होती
रही
चाह
फूलों
की
थी
काँटों
पर
गुज़र
होती
रही
- Tarun Bharadwaj
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उसको
चाहा
और
चाहत
पर
क़ायम
हैं
पर
अफ़सोस
के
हम
इज़हार
नहीं
कर
सकते
Shadab Asghar
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मुझे
चाह
थी
किसी
और
की,
प
मुझे
मिला
कोई
और
है
मेरी
ज़िन्दगी
का
है
और
सच,
मेरे
ख़्वाब
सा
कोई
और
है
तू
क़रीब
था
मेरे
जिस्म
के,
बड़ा
दूर
था
मेरी
रूह
से
तू
मेरे
लिए
मेरे
हमनशीं
कोई
और
था
कोई
और
है
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Avtar Singh Jasser
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उड़
गए
सारे
परिंदे
मौसमों
की
चाह
में
इंतिज़ार
उन
का
मगर
बूढे
शजर
करते
रहे
Ambreen Haseeb Ambar
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ज़रा
पाने
की
चाहत
में
बहुत
कुछ
छूट
जाता
है
नदी
का
साथ
देता
हूँ
समुंदर
रूठ
जाता
है
Aalok Shrivastav
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चाह
थी
दो
जहाँ
की
मगर
देखिए
इक
गली
से
गुज़रता
रहा
उम्र
भर
Ashraf Jahangeer
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मैं
चाहता
यही
था
सब
चाह
ख़त्म
हो
अब
फिर
चाहकर
तुम्हें
बदला
ये
ख़याल
मेरा
Abhay Aadiv
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तुझको
छू
कर
और
किसी
की
चाह
रखें
हैरत
है
और
लानत
ऐसे
हाथों
पर
Varun Anand
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उसकी
चाहत
में
भी
इख़लास
नहीं
था
शायद
और
कुछ
हम
भी
उसे
दिल
से
नहीं
चाह
सके
Salman ashhadi sahil
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मैं
आज
जो
भी
कहूँगा
तुम
सेे
वो
सच
है
जानम
ये
जान
लो
तुम
मिरी
ग़ज़ल
के
हरेक
मिसरे
से
मेरी
चाहत
झलक
रही
है
Amaan Pathan
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इस
कमरे
में
लाश
पड़ी
है
चाहत
की
और
यहाँ
इक
याद
भटकती
रहती
है
Shivam Tiwari
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आने
का
वा'दा
करो
ऐसे
न
इंकार
करो
है
अगर
इश्क़
तो
फिर
इश्क़
का
इज़हार
करो
Tarun Bharadwaj
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इश्क़
में
बस
यही
तो
होता
है
लोग
हँसते
है
क़ल्ब
रोता
है
Tarun Bharadwaj
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मेरा
दिल
तुम
शौक़
से
तोड़ो
एक
तजुर्बा
और
सही
जलता
दीपक
आके
बुझा
दो
दिल
में
अँधेरा
और
सही
भीड़
में
तन्हा
रहता
हूँ
मैं
मंज़र
आकर
देख
लो
ये
लाख
तमाशे
देखे
होंगे
एक
तमाशा
और
सही
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Tarun Bharadwaj
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चला
है
जोश
में
मक़्तल
की
ओर
जोशीला
उसी
को
देख
के
कितनों
को
अक़्ल
आई
है
Tarun Bharadwaj
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ख़ुदा
का
ज़िक्र
है
वाइज़
की
पारसाई
है
अगरचे
धूम
वहाँ
रिंदों
ने
मचाई
है
चला
है
जोश
में
मक़तल
की
ओर
जोशीला
उसी
को
देख
के
कितनों
को
अक़्ल
आई
है
हवा
से
लौटेंगे
उतरेगा
जब
नशा
सबका
ये
कह
के
रिंद
ने
मय
की
हँसी
उड़ाई
है
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Tarun Bharadwaj
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