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Tarun Bharadwaj
KHuda ka zikr hai waiz ki paarsaai hai
KHuda ka zikr hai waiz ki paarsaai hai | ख़ुदा का ज़िक्र है वाइज़ की पारसाई है
- Tarun Bharadwaj
ख़ुदा
का
ज़िक्र
है
वाइज़
की
पारसाई
है
अगरचे
धूम
वहाँ
रिंदों
ने
मचाई
है
चला
है
जोश
में
मक़तल
की
ओर
जोशीला
उसी
को
देख
के
कितनों
को
अक़्ल
आई
है
हवा
से
लौटेंगे
उतरेगा
जब
नशा
सबका
ये
कह
के
रिंद
ने
मय
की
हँसी
उड़ाई
है
- Tarun Bharadwaj
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अश्क
माँ
के
जो
ख़ुशी
से
गिरे
तो
हैं
मोती
और
छलके
जो
ग़मों
से
तो
लहू
हो
जाए
S M Afzal Imam
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उम्र
के
आख़िरी
मक़ाम
में
हम
मिल
भी
जाए
तो
क्या
ख़ुशी
होगी
क्या
सितम
तुम
को
देखने
के
लिए
हम
को
दुनिया
भी
देखनी
होगी
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Vikram Sharma
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ये
कह
के
दिल
ने
मिरे
हौसले
बढ़ाए
हैं
ग़मों
की
धूप
के
आगे
ख़ुशी
के
साए
हैं
Mahirul Qadri
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चंद
कलियाँ
नशात
की
चुन
कर
मुद्दतों
महव-ए-यास
रहता
हूँ
तेरा
मिलना
ख़ुशी
की
बात
सही
तुझ
से
मिल
कर
उदास
रहता
हूँ
Sahir Ludhianvi
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तू
अपने
घर
में
मुहब्बत
की
जीत
पर
ख़ुश
है
अभी
ठहर
के
मेरा
ख़ानदान
बाक़ी
है
Siraj Faisal Khan
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वो
बे-वफ़ा
है
तो
क्या
मत
कहो
बुरा
उसको
कि
जो
हुआ
सो
हुआ
ख़ुश
रखे
ख़ुदा
उसको
Naseer Turabi
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हम
ऐसे
लोग
भी
जाने
कहाँ
से
आते
हैं
ख़ुशी
में
रोते
हैं
जो
ग़म
में
मुस्कुराते
हैं
हमारा
साथ
भला
कब
तलक
निभाते
आप
कभी
कभी
तो
हमीं
ख़ुद
से
ऊब
जाते
हैं
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Mohit Dixit
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मिरी
सुब्ह
का
यूँँ
भी
इज़हार
हो
पियाला
हो
कॉफ़ी
का
अख़बार
हो
कोई
जुर्म
साबित
न
हो
उसका
फिर
जो
तेरी
हँसी
में
गिरफ़्तार
हो
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Swapnil Tiwari
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कौन
सी
बात
कहाँ
कैसे
कही
जाती
है
ये
सलीक़ा
हो
तो
हर
बात
सुनी
जाती
है
एक
बिगड़ी
हुई
औलाद
भला
क्या
जाने
कैसे
माँ-बाप
के
होंठों
से
हँसी
जाती
है
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Waseem Barelvi
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ज़िक्र
तबस्सुम
का
आते
ही
लगते
हैं
इतराने
लोग
और
ज़रा
सी
ठेस
लगी
तो
जा
पहुँचे
मयख़ाने
लोग
Ateeq Allahabadi
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कि
'ताहिर'
यही
है
ज़माना
न
दिल
तुम
लगाना
सही
में
Tarun Bharadwaj
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वो
तभी
पाया
गया
है
पास
में
जब
हमें
यूँँ
बेख़ुदी
होने
लगी
Tarun Bharadwaj
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आँखें
थकी
थकी
है
ये
दिल
भी
रोया
है
तेरी
ख़ातिर
हमने
क्या
क्या
खोया
है
Tarun Bharadwaj
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इस
तरह
सिलसिला
रहा
बाक़ी
रूठे
रूठे
जवाब
आते
रहे
Tarun Bharadwaj
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दिल
का
मैं
समझा
था
क़रार
जिसे
वो
दिल-ए-बेक़रार
ले
डूबा
Tarun Bharadwaj
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