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Tarun Bharadwaj
vo tabhi paaya gaya hai paas men
vo tabhi paaya gaya hai paas men | वो तभी पाया गया है पास में
- Tarun Bharadwaj
वो
तभी
पाया
गया
है
पास
में
जब
हमें
यूँँ
बेख़ुदी
होने
लगी
- Tarun Bharadwaj
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वही
मंज़िलें
वही
दश्त
ओ
दर
तिरे
दिल-ज़दों
के
हैं
राहबर
वही
आरज़ू
वही
जुस्तुजू
वही
राह-ए-पुर-ख़तर-ए-जुनूँ
Noon Meem Rashid
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हम
को
जुनूँ
क्या
सिखलाते
हो
हम
थे
परेशाँ
तुम
से
ज़ियादा
चाक
किए
हैं
हम
ने
अज़ीज़ो
चार
गरेबाँ
तुम
से
ज़ियादा
Majrooh Sultanpuri
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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मेरे
जुनूँ
का
नतीजा
ज़रूर
निकलेगा
इसी
सियाह
समुंदर
से
नूर
निकलेगा
Ameer Qazalbash
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मेरी
अक्ल-ओ-होश
की
सब
हालतें
तुमने
साँचे
में
जुनूँ
के
ढाल
दी
कर
लिया
था
मैंने
अहद-ए-तर्क-ए-इश्क़
तुमने
फिर
बाँहें
गले
में
डाल
दी
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Jaun Elia
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हर
एक
सम्त
यहाँ
वहशतों
का
मस्कन
है
जुनूँ
के
वास्ते
सहरा
ओ
आशियाना
क्या
Azhar Iqbal
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कुछ
न
मैं
समझा
जुनून
ओ
इश्क़
में
देर
नासेह
मुझ
को
समझाता
रहा
Meer Taqi Meer
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मोहब्बत
नेक-ओ-बद
को
सोचने
दे
ग़ैर-मुमकिन
है
बढ़ी
जब
बे-ख़ुदी
फिर
कौन
डरता
है
गुनाहों
से
Arzoo Lakhnavi
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ख़ुदा
बचाए
तिरी
मस्त
मस्त
आँखों
से
फ़रिश्ता
हो
तो
बहक
जाए
आदमी
क्या
है
Khumar Barabankvi
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कमी
न
की
तिरे
वहशी
ने
ख़ाक
उड़ाने
में
जुनूँ
का
नाम
उछलता
रहा
ज़माने
में
Firaq Gorakhpuri
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परिंदे
उड़
गए
अब
सिर्फ़
शाख़
बाक़ी
है
शरीर
जल
गए
अब
सिर्फ़
राख़
बाक़ी
है
Tarun Bharadwaj
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ख़ुदा
का
ज़िक्र
है
वाइज़
की
पारसाई
है
अगरचे
धूम
वहाँ
रिंदों
ने
मचाई
है
Tarun Bharadwaj
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तुम
तो
थक
कर
बैठ
गए
हो
मंज़िल
कैसे
पाओगे
तन्हा
अँधेरी
रात
बहुत
है
कैसे
दीप
जलाओगे
Tarun Bharadwaj
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सारी
नमी
को
सोख
के
सहरा
को
तर
कर
दूँ
बादल
बनूँ
तो
यूँँ
बनूँ
दरिया
को
तर
कर
दूँ
Tarun Bharadwaj
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वो
अपने
वादे
का
यूँॅं
एहतराम
करता
है
बस
एक
जुमले
में
क़िस्सा
तमाम
करता
है
Tarun Bharadwaj
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