saaz haathon men uthao to ghazal pesh karoon | साज़ हाथों में उठाओ तो ग़ज़ल पेश करूँँ

  - Tarun Bharadwaj
साज़हाथोंमेंउठाओतोग़ज़लपेशकरूँँ
तुमनज़रमुझसेमिलाओतोग़ज़लपेशकरूँँ
येहैपैग़ाम-ए-मोहब्बतइसेछुपकरसुनो
तुममिरेसामनेआओतोग़ज़लपेशकरूँँ
दूरहीदूरजलाओमोहब्बतकेचराग़
रौशनीबनकेतुमआओतोग़ज़लपेशकरूँँ
तन्हातन्हासीनज़रआतीहैदुनियामेरी
तुममिरेपासजोआओतोग़ज़लपेशकरूँँ
बारहातुमनेसतायाहैमुझेरातऔरदिन
मुझकोइतनासताओतोग़ज़लपेशकरूँँ
हमहैंवोइश्क़केपंछीजोग़ज़लकहतेहैं
तुमग़ज़लमुझकोसुनाओतोग़ज़लपेशकरूँँ
तुमकोचाहाहैतह-ए-दिलसेयक़ीननहमने
तुममिरेदिलमेंसमाओतोग़ज़लपेशकरूँँ
झूटेवा'दोंसेतसल्लीनहींमिलतीहै'तरूण'
सच्चाआईनादिखाओतोग़ज़लपेशकरूँँ
  - Tarun Bharadwaj
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