ik nazar dekh'ne ki zid pe arde hote hain | इक नज़र देख'ने की ज़िद पे अड़े होते हैं

  - Subodh Sharma "Subh"
इकनज़रदेख'नेकीज़िदपेअड़ेहोतेहैं
उँगलियाँछोड़केशानोंपेखड़ेहोतेहैं
देखकररोज़यहीसोच'ताहूँजूतोंको
बापकेपाँवक्यूँँइत'नेबड़ेहोतेहैं
कौनहासिलहैमुझेकौनमेराअपनाहै
फ़ैसलेसबयेनसीबोंपेपड़ेहोतेहैं
उम्रतोबीतहीजानीहैइसेभरनेमें
बख़्तकीमारकेभीघावबड़ेहोतेहैं
  - Subodh Sharma "Subh"
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