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Yash
chadhte hue basant men mujhko mili ho yuñ
chadhte hue basant men mujhko mili ho yuñ | चढ़ते हुए बसंत में मुझको मिली हो यूँँ
- Yash
चढ़ते
हुए
बसंत
में
मुझको
मिली
हो
यूँँ
होने
लगी
है
दिल
को
भी
खिलने
की
आरज़ू
- Yash
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बन
कर
कसक
चुभती
रही
दिल
में
मिरे
इक
आह
थी
ऐ
हम–नफ़स
मेरे
मुझे
तुझ
सेे
वफ़ा
की
चाह
थी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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चाहत
में
मर
जाने
वाली
लड़की
हो
तुम
सचमुच
अफ़साने
वाली
लड़की
हो
आख़िरी
बैंच
पे
बैठने
वाला
लड़का
मैं
जाओ
तुम
अव्वल
आने
वाली
लड़की
हो
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Zubair Ali Tabish
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हुस्न
बख़्शा
जो
ख़ुदा
ने
आप
बख़्शें
दीद
अपनी
आरज़ू–ए–चश्म
पूरी
हो
मुकम्मल
ईद
अपनी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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भटकती
रूहों
का
बोझ
कब
तक
कोई
उठाता
कहीं
ठहरता,पनाह
लेता,
तो
साथ
होता
मैं
जिस
'अक़ीदत
के
साथ
उसको
भुला
रहा
हूँ
उसी
'अक़ीदत
से
चाह
लेता,
तो
साथ
होता
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Armaan khan
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सजा
है
प्रेम
का
उपवन
तुम्हीं
से
हमारी
चाह
है
पावन
तुम्हीं
से
सभी
में
प्रेम
देखें
प्रेम
चाहें
मिली
है
ये
मुझे
चितवन
तुम्हीं
से
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Vikas Sahaj
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बादबाँ
नाज़
से
लहरा
के
चली
बाद-ए-मुराद
कारवाँ
ईद
मना
क़ाफ़िला-सालार
आया
Josh Malihabadi
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दिल
को
तेरी
चाहत
पे
भरोसा
भी
बहुत
है
और
तुझ
से
बिछड़
जाने
का
डर
भी
नहीं
जाता
Ahmad Faraz
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ज़िंदगी
में
तब
से
चाहत
की
रही
नइँ
जुस्तुजू
जब
से
हमने
आपसे
पहली
दफ़ा
की
गुफ़्तगू
Bhawna Bhatt
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हज़ारों
ख़्वाहिशें
ऐसी
कि
हर
ख़्वाहिश
पे
दम
निकले
बहुत
निकले
मिरे
अरमान
लेकिन
फिर
भी
कम
निकले
Mirza Ghalib
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किसी
के
ज़ख़्म
पर
चाहत
से
पट्टी
कौन
बाँधेगा
अगर
बहनें
नहीं
होंगी
तो
राखी
कौन
बाँधेगा
Munawwar Rana
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मुझ
से
इक
शाम
वो
यूँँ
ख़फ़ा
हो
गया
लोगों
ने
समझा
मैं
बे-वफ़ा
हो
गया
उसकी
ही
शर्त
पे
था
मनाया
उसे
पर
ये
भी
अब
कई
मर्तबा
हो
गया
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Yash
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हम
से
भी
कर
रहे
हो
तुम
उम्मीद
प्यार
की
हम
तो
बने
हैं
दिल
को
दुखाने
के
वास्ते
Yash
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जो
ये
जितने
भी
नाकारे
हुए
हैं
मुहब्बत
के
सभी
मारे
हुए
हैं
Yash
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मुझ
सेे
इक
शाम
वो
यूँँ
ख़फ़ा
हो
गया
लोगों
ने
समझा
मैं
बे-वफ़ा
हो
गया
उसकी
ही
शर्त
पे
था
मनाता
उसे
पर
ये
भी
अब
कई
मर्तबा
हो
गया
बारहा
मैंने
चाहा
के
वो
लौट
आए
पर
ये
क़िस्सा
भी
कितनी
दफ़ा
हो
गया
इश्क़
है
ये
कोई
सौदा
तो
है
नहीं
सो
उदासी
में
थोड़ा
नफ़ा
हो
गया
उसने
इक
दिन
मुझे
बे-तुका
कह
दिया
फिर
वही
ज़ीस्त
का
फ़लसफ़ा
हो
गया
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Yash
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फ़क़त
ये
उदासी
है
जो
मुझ
में
घर
कर
रही
है
तेरी
ख़ामुशी
देख
क्या
क्या
असर
कर
रही
है
मैं
गोसे
में
तन्हाई
के
ढूँढता
हूँ
किसी
को
कमी
तेरी
ही
तो
मुझे
दर-ब-दर
कर
रही
है
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Yash
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