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Yash
mujhse ik shaam vo yuñ khafa ho gaya
mujhse ik shaam vo yuñ khafa ho gaya | मुझ सेे इक शाम वो यूँँ ख़फ़ा हो गया
- Yash
मुझ
सेे
इक
शाम
वो
यूँँ
ख़फ़ा
हो
गया
लोगों
ने
समझा
मैं
बे-वफ़ा
हो
गया
उसकी
ही
शर्त
पे
था
मनाता
उसे
पर
ये
भी
अब
कई
मर्तबा
हो
गया
बारहा
मैंने
चाहा
के
वो
लौट
आए
पर
ये
क़िस्सा
भी
कितनी
दफ़ा
हो
गया
इश्क़
है
ये
कोई
सौदा
तो
है
नहीं
सो
उदासी
में
थोड़ा
नफ़ा
हो
गया
उसने
इक
दिन
मुझे
बे-तुका
कह
दिया
फिर
वही
ज़ीस्त
का
फ़लसफ़ा
हो
गया
- Yash
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चढ़ते
हुए
बसंत
में
मुझको
मिली
हो
यूँँ
होने
लगी
है
दिल
को
भी
खिलने
की
आरज़ू
Yash
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हम
से
भी
कर
रहे
हो
तुम
उम्मीद
प्यार
की
हम
तो
बने
हैं
दिल
को
दुखाने
के
वास्ते
Yash
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फ़क़त
ये
उदासी
है
जो
मुझ
में
घर
कर
रही
है
तेरी
ख़ामुशी
देख
क्या
क्या
असर
कर
रही
है
मैं
गोसे
में
तन्हाई
के
ढूँढता
हूँ
किसी
को
कमी
तेरी
ही
तो
मुझे
दर-ब-दर
कर
रही
है
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Yash
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जो
ये
जितने
भी
नाकारे
हुए
हैं
मुहब्बत
के
सभी
मारे
हुए
हैं
Yash
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मुझ
से
इक
शाम
वो
यूँँ
ख़फ़ा
हो
गया
लोगों
ने
समझा
मैं
बे-वफ़ा
हो
गया
उसकी
ही
शर्त
पे
था
मनाया
उसे
पर
ये
भी
अब
कई
मर्तबा
हो
गया
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