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Yash
jo ye jitne bhi naakaare hue hain
jo ye jitne bhi naakaare hue hain | जो ये जितने भी नाकारे हुए हैं
- Yash
जो
ये
जितने
भी
नाकारे
हुए
हैं
मुहब्बत
के
सभी
मारे
हुए
हैं
- Yash
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वो
जो
पहला
था
अपना
इश्क़
वही
आख़िरी
वारदात
थी
दिल
की
Pooja Bhatia
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किसी
भी
शख़्स
के
झूठे
दिलासे
में
नहीं
आती
कहानी
हो
अगर
लंबी
तराशे
में
नहीं
आती
जहाँ
में
अब
कहाँ
कोई
जो
मजनूँ
की
तरह
चाहे
मोहब्बत
इसलिए
भी
अब
तमाशे
में
नहीं
आती
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Ansar Ethvi
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मुझ
में
थोड़ी
सी
जगह
भी
नहीं
नफ़रत
के
लिए
मैं
तो
हर
वक़्त
मोहब्बत
से
भरा
रहता
हूँ
Mirza Athar Zia
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दीवार
है
दुनिया
इसे
राहों
से
हटा
दे
हर
रस्म-ए-मोहब्बत
को
मिटाने
के
लिए
आ
Hasrat Jaipuri
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'असद'
ये
शर्त
नहीं
है
कोई
मुहब्बत
में
कि
जिस
सेे
प्यार
करो
उसकी
आरज़ू
भी
करो
Subhan Asad
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किताब-ए-इश्क़
में
हर
आह
एक
आयत
है
पर
आँसुओं
को
हुरूफ़-ए-मुक़त्तिआ'त
समझ
Umair Najmi
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इश्क़
के
इज़हार
में
हर-चंद
रुस्वाई
तो
है
पर
करूँँ
क्या
अब
तबीअत
आप
पर
आई
तो
है
Akbar Allahabadi
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जब
चाहें
सो
जाते
थे
हम,
तुम
सेे
बातें
करके
तब
उल्टी
गिनती
गिनने
से
भी
नींद
नहीं
आती
है
अब
इश्क़
मुहब्बत
पर
ग़ालिब
के
शे'र
सुनाए
उसको
जब
पहले
थोड़ा
शरमाई
वो
फिर
बोली
इसका
मतलब?
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Tanoj Dadhich
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किसी
के
इश्क़
में
बर्बाद
होना
हमें
आया
नहीं
फ़रहाद
होना
Manish Shukla
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फिर
वही
रोना
मुहब्बत
में
गिला
शिकवा
जहाँ
से
रस्म
है
बस
इसलिए
भी
तुम
को
साल-ए-नौ
मुबारक
Neeraj Neer
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ख़ामोशी
से
कब
तक
वार
होगा
गर
इश्क़
है
तो
इज़हार
होगा
Yash
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मुझ
से
इक
शाम
वो
यूँँ
ख़फ़ा
हो
गया
लोगों
ने
समझा
मैं
बे-वफ़ा
हो
गया
उसकी
ही
शर्त
पे
था
मनाया
उसे
पर
ये
भी
अब
कई
मर्तबा
हो
गया
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Yash
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फ़क़त
ये
उदासी
है
जो
मुझ
में
घर
कर
रही
है
तेरी
ख़ामुशी
देख
क्या
क्या
असर
कर
रही
है
मैं
गोसे
में
तन्हाई
के
ढूँढता
हूँ
किसी
को
कमी
तेरी
ही
तो
मुझे
दर-ब-दर
कर
रही
है
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Yash
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हम
से
भी
कर
रहे
हो
तुम
उम्मीद
प्यार
की
हम
तो
बने
हैं
दिल
को
दुखाने
के
वास्ते
Yash
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मुझ
सेे
इक
शाम
वो
यूँँ
ख़फ़ा
हो
गया
लोगों
ने
समझा
मैं
बे-वफ़ा
हो
गया
उसकी
ही
शर्त
पे
था
मनाता
उसे
पर
ये
भी
अब
कई
मर्तबा
हो
गया
बारहा
मैंने
चाहा
के
वो
लौट
आए
पर
ये
क़िस्सा
भी
कितनी
दफ़ा
हो
गया
इश्क़
है
ये
कोई
सौदा
तो
है
नहीं
सो
उदासी
में
थोड़ा
नफ़ा
हो
गया
उसने
इक
दिन
मुझे
बे-तुका
कह
दिया
फिर
वही
ज़ीस्त
का
फ़लसफ़ा
हो
गया
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Yash
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