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Sohit Singla
ghusse ki hai jagah nahin
ghusse ki hai jagah nahin | ग़ुस्से की है जगह नहीं
- Sohit Singla
ग़ुस्से
की
है
जगह
नहीं
झगड़ा
भी
हो
तो
प्यार
से
- Sohit Singla
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इक
दफ़ा
चमका
था
जुगनुओं
की
जगह
सो
जलाया
गया
मैं
दियों
की
जगह
तुमको
दिल
में
बसाने
पे
हैरानी
है
जेल
में
होती
है
क़ातिलों
की
जगह
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Saahir
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पहले
थोड़ी
मुश्किल
होगी
आगे
लेकिन
मंज़िल
होगी
सब
बाराती
शायर
होंगे
मेरी
शादी
महफ़िल
होगी
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Tanoj Dadhich
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सब
कर
लेना
लम्हे
ज़ाया'
मत
करना
ग़लत
जगह
पर
जज़्बे
ज़ाया'
मत
करना
Ali Zaryoun
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तेग़-बाज़ी
का
शौक़
अपनी
जगह
आप
तो
क़त्ल-ए-आम
कर
रहे
हैं
Jaun Elia
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सिर्फ़
उस
के
होंट
काग़ज़
पर
बना
देता
हूँ
मैं
ख़ुद
बना
लेती
है
होंटों
पर
हँसी
अपनी
जगह
Anwar Shaoor
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मैं
अकेला
ही
चला
था
जानिब-ए-मंज़िल
मगर
लोग
साथ
आते
गए
और
कारवाँ
बनता
गया
Majrooh Sultanpuri
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मेरे
नाम
से
क्या
मतलब
है
तुम्हें
मिट
जाएगा
या
रह
जाता
है
जब
तुम
ने
ही
साथ
नहीं
रहना
फिर
पीछे
क्या
रह
जाता
है
मेरे
पास
आने
तक
और
किसी
की
याद
उसे
खा
जाती
है
वो
मुझ
तक
कम
ही
पहुँचता
है
किसी
और
जगह
रह
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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आपने
मुझको
डुबोया
है
किसी
और
जगह
इतनी
गहराई
कहाँ
होती
है
दरिया
में
Tehzeeb Hafi
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बुरी
सरिश्त
न
बदली
जगह
बदलने
से
चमन
में
आ
के
भी
काँटा
गुलाब
हो
न
सका
Arzoo Lakhnavi
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मौत
ने
सारी
रात
हमारी
नब्ज़
टटोली
ऐसा
मरने
का
माहौल
बनाया
हमने
घर
से
निकले
चौक
गए
फिर
पार्क
में
बैठे
तन्हाई
को
जगह-जगह
बिखराया
हमने
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Shariq Kaifi
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हिज्र
करते
विसाल
करते
पर
यूँँ
नहीं
बीच
में
फँसाना
था
Sohit Singla
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चलो
करके
जिगर
इज़हार
करता
हूँ
सनम
कैसे
कहूँ
बस
प्यार
करता
हूँ
समझती
हो
मेरी
ख़ामोशी
भी
तुम
तो
बिना
ही
बात
तुमको
ख़्वार
करता
हूँ
मुहब्बत
बढ़ती
है
झगड़े
लड़ाई
से
कभी
तुमको
तभी
बेज़ार
करता
हूँ
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Sohit Singla
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मुझे
तेरी
मुहब्बत
भी
ज़रूरी
है
ज़रा
सी
तेरी
नफ़रत
भी
ज़रूरी
है
जहाँ
अपनाए
दुत्कारे
मुझे
लेकिन
मुझे
ख़ुद
से
ही
रग़बत
भी
ज़रूरी
है
ज़माने
के
दिलों
से
वो
न
रुख़्सत
हो
ख़ुदा
की
हो
इबादत
भी
ज़रूरी
है
नहीं
हो
ये
ज़ियादा
कम
मुहब्बत
में
मुहब्बत
में
क़नाअत
भी
ज़रूरी
है
करे
कोई
जतन
लाखों
मगर
फिर
भी
मुक़द्दर
की
इनायत
भी
ज़रूरी
है
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Sohit Singla
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मुझे
अश्क
यारों
बहाना
कभी
था
ख़ज़ाना
दिलों
का
लुटाना
कभी
था
रुलाते
रहे
वो
मगर
ये
गिला
है
रुलाते
सही
पर
हँसाना
कभी
था
बदन
था
लगी
आग
की
तरह
उसका
हसद
में
तभी
तो
ज़नाना
कभी
था
मिला
के
नज़र
वो
दिखाता
अदाएंँ
अदाकार
सोहित
दिवाना
कभी
था
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Sohit Singla
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मता'-ए-ज़ीस्त
मेरी
है
सनम
आलम
का
सरमाया
फ़क़त
तेरा
ही
होकर
रहने
में
सबका
ख़सारा
है
Sohit Singla
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