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Sohit Singla
mata'-e-zeest meri hai sanam aalam ka sarmaaya
mata'-e-zeest meri hai sanam aalam ka sarmaaya | मता'-ए-ज़ीस्त मेरी है सनम आलम का सरमाया
- Sohit Singla
मता'-ए-ज़ीस्त
मेरी
है
सनम
आलम
का
सरमाया
फ़क़त
तेरा
ही
होकर
रहने
में
सबका
ख़सारा
है
- Sohit Singla
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ग़म
और
ख़ुशी
में
फ़र्क़
न
महसूस
हो
जहाँ
मैं
दिल
को
उस
मक़ाम
पे
लाता
चला
गया
Sahir Ludhianvi
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सिर्फ़
ज़िंदा
रहने
को
ज़िंदगी
नहीं
कहते
कुछ
ग़म-ए-मोहब्बत
हो
कुछ
ग़म-ए-जहाँ
यारो
Himayat Ali Shayar
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नहीं
दुनिया
को
जब
परवाह
हमारी
तो
फिर
दुनिया
की
परवाह
क्यूँँ
करें
हम
Jaun Elia
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चलो
ऐ
हिंद
के
सैनिक
कि
लहराएँ
तिरंगा
हम
जिसे
दुनिया
नमन
करती
है
उस
पर्वत
की
चोटी
पर
ATUL SINGH
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जहाँ
जो
था
वहीं
रहना
था
उस
को
मगर
ये
लोग
हिजरत
कर
रहे
हैं
Liaqat Jafri
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मेरे
होंटों
पे
अपनी
प्यास
रख
दो
और
फिर
सोचो
कि
इस
के
बा'द
भी
दुनिया
में
कुछ
पाना
ज़रूरी
है
Waseem Barelvi
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तुम्हारे
साथ
था
तो
मैं
गम-ए-उल्फ़त
में
उलझा
था
तुम्हें
छोड़ा
तो
ये
जाना
कि
दुनिया
ख़ूब-सूरत
है
Nirbhay Nishchhal
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पत्थर
के
इस
जहाँ
में
थी
रोने
लगी
सभा
जब
आदमी
ने
आदमी
को
आदमी
कहा
SHIV SAFAR
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अपनी
दुनिया
भी
चल
पड़े
शायद
इक
रुका
फ़ैसला
किया
जाए
Madan Mohan Danish
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जिसकी
ख़ातिर
हम
भुला
बैठे
हैं
दुनिया
दोस्तों
से
ही
उन्हें
फ़ुर्सत
नहीं
है
Shashank Shekhar Pathak
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मुझे
तेरी
मुहब्बत
भी
ज़रूरी
है
ज़रा
सी
तेरी
नफ़रत
भी
ज़रूरी
है
जहाँ
अपनाए
दुत्कारे
मुझे
लेकिन
मुझे
ख़ुद
से
ही
रग़बत
भी
ज़रूरी
है
ज़माने
के
दिलों
से
वो
न
रुख़्सत
हो
ख़ुदा
की
हो
इबादत
भी
ज़रूरी
है
नहीं
हो
ये
ज़ियादा
कम
मुहब्बत
में
मुहब्बत
में
क़नाअत
भी
ज़रूरी
है
करे
कोई
जतन
लाखों
मगर
फिर
भी
मुक़द्दर
की
इनायत
भी
ज़रूरी
है
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Sohit Singla
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मिटेंगे
किसी
रोज़
ये
वाहिमा
सब
खुलेंगे
किसी
रोज़
ये
चश्म
अपने
Sohit Singla
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ये
साल
जो
गुज़ार
दिया
साथ
तेरे
अब
ये
साल
बस
गुज़ारना
ता-'उम्र
है
मुझे
Sohit Singla
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यूँँ
है
असर
तेरी
ये
हम-आग़ोशी
का
घुटता
है
दम
सा
पुर-फ़ज़ा
में
अब
मिरा
Sohit Singla
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हसद
को
ज़िंदा
कर
के
देखते
हैं
गली
उसकी
गुज़र
के
देखते
हैं
नहीं
ये
रास
आई
ज़िंदगी
सो
चलो
इक
बार
मर
के
देखते
हैं
सभी
बस
देखते
मंज़िल
मगर
वो
नहीं
दुख
सुख
सफ़र
के
देखते
हैं
नहीं
मैं
देखती
तुमको
अदास
मुझे
ये
बात
कर
के
देखते
हैं
सभी
कहते
हैं
उनको
गुलबदन
सो
ख़ुदी
गुलज़ार
भर
के
देखते
हैं
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Sohit Singla
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