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Sohit Singla
mitenge kisi roz ye waahima sab
mitenge kisi roz ye waahima sab | मिटेंगे किसी रोज़ ये वाहिमा सब
- Sohit Singla
मिटेंगे
किसी
रोज़
ये
वाहिमा
सब
खुलेंगे
किसी
रोज़
ये
चश्म
अपने
- Sohit Singla
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माँग
सिन्दूर
भरी
हाथ
हिनाई
करके
रूप
जोबन
का
ज़रा
और
निखर
आएगा
जिसके
होने
से
मेरी
रात
है
रौशन
रौशन
चाँद
में
आज
वही
अक्स
नज़र
आएगा
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Azhar Iqbal
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मैं
नज़र
से
पी
रहा
था
तो
ये
दिल
ने
बद-दुआ
दी
तिरा
हाथ
ज़िंदगी
भर
कभी
जाम
तक
न
पहुँचे
Shakeel Badayuni
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तुम्हें
ज़रूर
कोई
चाहतों
से
देखेगा
मगर
वो
आँखें
हमारी
कहाँ
से
लाएगा
तुम्हारे
साथ
ये
मौसम
फ़रिश्तों
जैसा
है
तुम्हारे
बा'द
ये
मौसम
बहुत
सताएगा
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Bashir Badr
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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अलग
बैठे
थे
फिर
भी
आँख
साक़ी
की
पड़ी
हम
पर
अगर
है
तिश्नगी
कामिल
तो
पैमाने
भी
आएँगे
Majrooh Sultanpuri
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है
राम
के
वजूद
पे
हिन्दोस्ताँ
को
नाज़
अहल-ए-नज़र
समझते
हैं
उस
को
इमाम-ए-हिंद
Allama Iqbal
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आँख
भर
आई
किसी
से
जो
मुलाक़ात
हुई
ख़ुश्क
मौसम
था
मगर
टूट
के
बरसात
हुई
Manzar Bhopali
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वो
मेरी
पीठ
में
ख़ंजर
ज़रूर
उतारेगा
मगर
निगाह
मिलेगी
तो
कैसे
मारेगा
Waseem Barelvi
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क्या
दुख
है
समुंदर
को
बता
भी
नहीं
सकता
आँसू
की
तरह
आँख
तक
आ
भी
नहीं
सकता
तू
छोड़
रहा
है
तो
ख़ता
इस
में
तेरी
क्या
हर
शख़्स
मेरा
साथ
निभा
भी
नहीं
सकता
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Waseem Barelvi
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कभी
पहले
नहीं
था
जिस
क़दर
मजबूर
हूँ
मैं
आज
नज़र
आऊँ
न
ख़ुद
क्या
तुम
सेे
इतना
दूर
हूँ
मैं
आज
तुम्हारे
ज़ख़्म
को
ख़ाली
नहीं
जाने
दिया
मैंने
तुम्हारी
याद
में
ही
चीख़
के
मशहूर
हूँ
मैं
आज
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SHIV SAFAR
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मता'-ए-ज़ीस्त
मेरी
है
सनम
आलम
का
सरमाया
फ़क़त
तेरा
ही
होकर
रहने
में
सबका
ख़सारा
है
Sohit Singla
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यूँँ
है
असर
तेरी
ये
हम-आग़ोशी
का
घुटता
है
दम
सा
पुर-फ़ज़ा
में
अब
मिरा
Sohit Singla
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मुझे
तेरी
मुहब्बत
भी
ज़रूरी
है
ज़रा
सी
तेरी
नफ़रत
भी
ज़रूरी
है
जहाँ
अपनाए
दुत्कारे
मुझे
लेकिन
मुझे
ख़ुद
से
ही
रग़बत
भी
ज़रूरी
है
ज़माने
के
दिलों
से
वो
न
रुख़्सत
हो
ख़ुदा
की
हो
इबादत
भी
ज़रूरी
है
नहीं
हो
ये
ज़ियादा
कम
मुहब्बत
में
मुहब्बत
में
क़नाअत
भी
ज़रूरी
है
करे
कोई
जतन
लाखों
मगर
फिर
भी
मुक़द्दर
की
इनायत
भी
ज़रूरी
है
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Sohit Singla
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पहले
थी
ज़िंदगी
सज़ा
है
प्यार
अब
तो
प्यार
से
Sohit Singla
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मैं
क्या
नया
करूँगा
देकर
गुलाब
उसको
जब
गुल
तमाम
कहते
हैं
लाजवाब
उसको
वो
मिल
गया
है
जिसको
मदहोश
है
वो
यारो
बरसों
के
प्यासे
तो
हैं
कहते
सराब
उसको
वो
आबिदों
की
जैसे
है
इल्तिमास
कोई
और
रिंद
बा-सफ़ा
भी
कहते
शराब
उसको
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Sohit Singla
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