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Sohit Singla
pahle thii zindagi saza
pahle thii zindagi saza | पहले थी ज़िंदगी सज़ा
- Sohit Singla
पहले
थी
ज़िंदगी
सज़ा
है
प्यार
अब
तो
प्यार
से
- Sohit Singla
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ज़िन्दगी
से
ऐसे
काटा
सीन
उसने
इश्क़
का
देखता
है
कोई
जैसे
फ़िल्म
गाने
काट
कर
Ankit Maurya
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ज़िंदगी
एक
कहानी
के
सिवा
कुछ
भी
नहीं
लोग
किरदार
निभाते
हुए
मर
जाते
हैं
Malikzada Javed
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ज़िन्दगी
अब
के
मेरा
नाम
ना
शामिल
करना
गर
ये
तय
है
कि
यही
खेल
दोबारा
होगा
Wasi Shah
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कीजे
इज़हार-ए-मोहब्बत
चाहे
जो
अंजाम
हो
ज़िंदगी
में
ज़िंदगी
जैसा
कोई
तो
काम
हो
Priyamvada ilhan
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ये
ज़मीं
किस
क़दर
सजाई
गई
ज़िंदगी
की
तड़प
बढ़ाई
गई
आईने
से
बिगड़
के
बैठ
गए
जिन
की
सूरत
जिन्हें
दिखाई
गई
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Sahir Ludhianvi
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उसके
जाने
और
आने
में
फ़क़त
यह
फ़र्क़
है
दूर
जाती
मौत
है
तो
पास
आती
ज़िन्दगी
Divy Kamaldhwaj
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छोड़कर
तन्हा
मुझे
जन्नत
में
रहने
लग
गए
हो
और
मैंने
ज़िन्दगीं
कर
ली
जहन्नम
शा'इरी
में
"Nadeem khan' Kaavish"
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बहुत
हसीन
सही
सोहबतें
गुलों
की
मगर
वो
ज़िंदगी
है
जो
काँटों
के
दरमियाँ
गुज़रे
Jigar Moradabadi
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तुम्हें
भी
साँस
लेने
की
कमी
हो
तुम्हें
भी
ज़िंदगी
ठुकरा
के
जाए
Ambar
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नहीं
आबो
हवा
में
ताज़गी
अब
दवा
की
सीसियों
में
ज़िन्दगी
है
Umesh Maurya
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चलो
करके
जिगर
इज़हार
करता
हूँ
सनम
कैसे
कहूँ
बस
प्यार
करता
हूँ
समझती
हो
मेरी
ख़ामोशी
भी
तुम
तो
बिना
ही
बात
तुमको
ख़्वार
करता
हूँ
मुहब्बत
बढ़ती
है
झगड़े
लड़ाई
से
कभी
तुमको
तभी
बेज़ार
करता
हूँ
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Sohit Singla
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यूँँ
है
असर
तेरी
ये
हम-आग़ोशी
का
घुटता
है
दम
सा
पुर-फ़ज़ा
में
अब
मिरा
Sohit Singla
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मुझे
अश्क
यारों
बहाना
कभी
था
ख़ज़ाना
दिलों
का
लुटाना
कभी
था
रुलाते
रहे
वो
मगर
ये
गिला
है
रुलाते
सही
पर
हँसाना
कभी
था
बदन
था
लगी
आग
की
तरह
उसका
हसद
में
तभी
तो
ज़नाना
कभी
था
मिला
के
नज़र
वो
दिखाता
अदाएंँ
अदाकार
सोहित
दिवाना
कभी
था
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Sohit Singla
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उधर
वो
पागलों
सा
इश्क़
करती
है
इधर
मैं
हूँ
उसे
ही
पगली
कहता
हूँ
Sohit Singla
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मता'-ए-ज़ीस्त
मेरी
है
सनम
आलम
का
सरमाया
फ़क़त
तेरा
ही
होकर
रहने
में
सबका
ख़सारा
है
Sohit Singla
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