phir shuroo tark-e-t'aalluq kii kahaanii mat karo | फिर शुरू तर्क-ए-त'अल्लुक़ की कहानी मत करो

  - Shubham Vaishnav
फिरशुरूतर्क-ए-त'अल्लुक़कीकहानीमतकरो
बातयेहैबातअबकुछभीपुरानीमतकरो
मैंनेतुमकोकहदियातुमसेेमुहब्बतहैतोहै
बातमेरीमानोइतनीबद-गुमानीमतकरो
ठीकहैयूँँदेखतेरहनामुझेलेकिनसुनो
चायटेबलपररखीहैइसकोपानीमतकरो
मैंतोमाँकोउसकेबारेमेंबताभीदेतापर
वोहीकहतीअपनीमनमानीतोजानीमतकरो
इसकीख़ुशबूमेंतोउसकेहोनेकाएहसासहै
मेरेआँगनसेजुदायेरात-रानीमतकरो
मानासबकुछठीकजायज़हैमुहब्बतमेंमगर
जोकॉलरमेंछिपेऐसीनिशानीमतकरो
मैंनेकरकेदेखातबयेकहताहूँयारोंसुनो
इश्क़करलोइश्क़मेंपरलन-तरानीमतकरो
इनबुज़ुर्गोंकोज़ियादातजरबाभीरहताहै
येमनाकरदेंजोकरनेकोतोयानीमतकरो
कौनजानेकौनकबकैसेमुकरजाएयहाँ
कोईभीसौदाकिसीसेमुँह-ज़बानीमतकरो
  - Shubham Vaishnav
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