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Shubham Vaishnav
phir shuroo tark-e-t'aalluq ki kahaanii mat karo
phir shuroo tark-e-t'aalluq ki kahaanii mat karo | फिर शुरू तर्क-ए-त'अल्लुक़ की कहानी मत करो
- Shubham Vaishnav
फिर
शुरू
तर्क-ए-त'अल्लुक़
की
कहानी
मत
करो
बात
ये
है
बात
अब
कुछ
भी
पुरानी
मत
करो
- Shubham Vaishnav
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बात
करते
हुए
बे-ख़याली
में
ज़ुल्फ़ें
खुली
छोड़
दी
हम
निहत्थों
पे
उसने
ये
कैसी
बलाएँ
खुली
छोड़
दी
साथ
जब
तक
रहे
एक
लम्हे
को
भी
रब्त
टूटा
नहीं
उसने
आँखें
अगर
बंद
कर
ली
तो
बाँहें
खुले
छोड़
दी
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Khurram Afaq
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फिर
आज
यारों
ने
तुम्हारी
बात
की
फिर
यार
महफ़िल
में
मिरी
खिल्ली
उड़ी
Harsh saxena
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कू-ब-कू
फैल
गई
बात
शनासाई
की
उस
ने
ख़ुश्बू
की
तरह
मेरी
पज़ीराई
की
Parveen Shakir
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ये
है
पहली
बात
तुझ
सेे
इश्क़
है
दूसरी
ये
बात,
पहली
बात
सुन
Siddharth Saaz
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तुम्हारे
पास
आते
हैं
तो
साँसें
भीग
जाती
हैं
मोहब्बत
इतनी
मिलती
है
कि
आँखें
भीग
जाती
हैं
तबस्सुम
इत्र
जैसा
है
हँसी
बरसात
जैसी
है
वो
जब
भी
बात
करती
है
तो
बातें
भीग
जाती
हैं
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Aalok Shrivastav
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तमाम
बातें
जो
चाहता
था
मैं
तुम
सेे
कहना
वो
एक
काग़ज़
पे
लिख
के
काग़ज़
जला
दिया
है
Dipendra Singh 'Raaz'
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ख़ुश्बू
की
बरसात
नहीं
कर
पाते
हैं
हम
ख़ुद
ही
शुरुआत
नहीं
कर
पाते
हैं
जिस
लड़की
की
बातें
करते
हैं
सब
सेे
उस
लड़की
से
बात
नहीं
कर
पाते
हैं
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Gyan Prakash Akul
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न
उसने
हाथ
लगाया
न
उसने
बातें
कीं
पड़े
पड़े
यूँँ
ही
ख़ुद
में
ख़राब
हो
गए
हम
Abhishek shukla
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जब
मसअले
न
हल
हो
सकें
बात-चीत
से
फिर
जंग
ही
लड़ो
कि
ज़माना
ख़राब
है
shaan manral
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दौलतें
मुद्दा
बनीं
या
ज़ात
आड़े
आ
गई
इश्क़
में
कोई
न
कोई
बात
आड़े
आ
गई
Baghi Vikas
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इस
तरह
शा'इरी
का
असर
हो
गया
खुशनुमा
ज़िंदगी
का
सफ़र
हो
गया
मिल
गई
चाँद
की
रौशनी
जब
उसे
इक
नया
पौधा
पूरा
शजर
हो
गया
यार
संगीत
इतना
सरल
भी
नहीं
तान
इक
सीखते
रात
भर
हो
गया
बाद
सर्दी
यहाँ
फिर
ज़ियादा
लगी
मेरा
कंबल
इधर
से
उधर
हो
गया
चाय
मीठी
बनी
और
अच्छी
बनी
देखते
सीखते
यह
हुनर
हो
गया
मैं
उसे
फिर
कभी
चूम
लूँगा
कहीं
पास
वो
पहले
जैसे
अगर
हो
गया
दिल
नहीं
लग
रहा
है
किसी
से
'शुभम'
कैसा
था
कैसा
तेरा
जिगर
हो
गया
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Shubham Vaishnav
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ये
मुहब्बत
दाख़िले
के
वक़्त
आसाँ
लगती
है
पर
मुहब्बत
में
शुरू
फिर
इम्तिहाँ
हो
जाते
हैं
Shubham Vaishnav
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आज
मुझको
कुछ
फ़साने
याद
आए
फिर
मुहब्बत
के
ज़माने
याद
आए
शाम
से
बैठे
जहाँ
पर
रात
करते
शाम
वो
सारे
ठिकाने
याद
आए
रास्ते
में
कोई
मुझको
मिल
गया
तो
यार
फिर
क़िस्से
पुराने
याद
आए
याद
आई
जब
कभी
दिल
को
किसी
की
फ़ैज़
साहिर
के
तराने
याद
आए
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Shubham Vaishnav
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मैं
उसे
फिर
कभी
भी
पुकारा
नहीं
ग़लतियाँ
जो
हुई
अब
दुबारा
नहीं
मैं
किताबों
भरी
ज़िंदगी
में
यहाँ
और
अब
दूसरा
भी
सहारा
नहीं
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Shubham Vaishnav
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ये
मत
पूछो
कि
उस
में
और
क्या-क्या
देखता
हूॅं
उसी
इक
शख़्स
में
मैं
अपनी
दुनिया
देखता
हूॅं
कभी
आँखें
कभी
चेहरा
कभी
लब
तो
कभी
तिल
कि
दिल
भरता
नहीं
मैं
उसको
जितना
देखता
हूॅं
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Shubham Vaishnav
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