jis | जिस

  - Shri kumar
जिस
मेंख़ुदकोपायाहै
उस
मेंरबकासायाहै
मुश्किलवक़्तनेखोलासच
अपनाकौनपरायाहै
फिरमाज़ीकीगलियोंने
क़िस्साएकसुनायाहै
रूठाहूँमैंजब-जबभी
तूनेख़ुदकोमनायाहै
देखमेराजज़्बा-ए-दिल
हिस्सेमेंग़मआयाहै
उलझेहैंसबइस
मेंही
क्याखोयाक्यापायाहै
नहींकहानीमेरीकुछबस
इककिरदारनिभायाहै
रुपिया-पइसातुमजानो
मैंनेरिश्ताकमायाहै
हरदमवक़्तसहीथा"श्री
वक़्तनेयेबतलायाहै
  - Shri kumar
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